मुंबई । वशिष्ठ वाणी । विशेष रिपोर्ट
मालाड पश्चिम, इलाके में चल रहे बड़े पैमाने पर पुनर्विकास (Redevelopment) के बीच निर्माण स्थलों से उठ रही धूल ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि क्षेत्र में AQI 300 के पार पहुँच गया है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने बीएमसी (BMC) के पी/उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी को लिखित शिकायत देकर नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।
नियमों की अनदेखी के आरोप
शिकायत में कहा गया है कि कई निर्माण स्थलों पर बीएमसी के 28 दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा। आरोप है कि:
- इमारतों पर ग्रीन नेट नहीं लगाई जा रही।
- निर्माण सामग्री सड़कों पर खुले में रखी जा रही है।
- साइट से निकलने वाले ट्रकों के पहिए नहीं धोए जा रहे।
- पानी का छिड़काव या एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल नहीं हो रहा।
- कई जगह AQI डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं।
स्वास्थ्य पर खतरा
इलाके में PM 2.5 का स्तर 100–120 के बीच पहुँच गया है, जिससे फेफड़ों की बीमारी, दमा, हृदय रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है।
इन डेवलपर्स के खिलाफ शिकायत
शिकायत में साई सोहम, मेसर्स एम.एस. स्टेन, एक्वारॉक बिल्डकॉन और जे.डी.एन. डेवलपर का नाम लिया गया है। सम्राट बागुल ने मांग की है कि जब तक प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नहीं किए जाते, तब तक इन साइट्स का निर्माण कार्य बंद कराया जाए।
सम्राट बागुल ने कहा, “हमारा संकल्प मालाड को स्वच्छ और धूल मुक्त बनाना है। विकास के नाम पर नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
अब देखना होगा कि बीएमसी प्रशासन इन लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।













