मुंबई/वशिष्ठ वाणी | जनकल्याण नगर, मलाड वेस्ट | विशेष विस्तृत रिपोर्ट
मलाड वेस्ट के जनकल्याण नगर इलाके में पिछले कई महीनों से चल रहे निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराज़गी है। आरोप है कि Dotom Group के प्रोजेक्ट स्थल पर भारी मशीनों से दिनभर ऐसा तेज़ शोर उत्पन्न किया जा रहा है, जिससे आसपास की सोसाइटियों में रहने वाले परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
निवासियों का कहना है कि मशीनों की आवाज इतनी तीव्र होती है मानो किसी सैन्य अभ्यास में मिसाइल या गोला-बारूद दागे जा रहे हों। घरों की खिड़कियाँ-दरवाज़े बंद करने के बावजूद कंपन और तेज़ ध्वनि से राहत नहीं मिलती। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमार व्यक्ति और घर से काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं।
🏢 सोसाइटी के नियम और कथित दोहरा मापदंड
निर्माण स्थल के समीप स्थित Royal Oasis सोसाइटी में आंतरिक मरम्मत और ड्रिलिंग के लिए सख्त समय-सीमा तय है:
- सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
- शाम 4 बजे से 6 बजे तक
- रविवार को पूर्ण प्रतिबंध
सोसाइटी प्रबंधन के अनुसार, यह नियम परिवारों की सुविधा, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के आराम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। नियम उल्लंघन पर पेनाल्टी भी लगाई जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम निवासी पर तो ये नियम सख्ती से लागू होते हैं, लेकिन बड़े बिल्डर के मामले में ऐसी सख्ती नज़र नहीं आती। इससे “दोहरे मापदंड” की चर्चा तेज़ हो गई है।
🚨 शिकायतें और पुलिस की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, कई निवासियों ने Mumbai Police से शिकायत की। एक महिला निवासी द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की भी जानकारी सामने आई।
हालांकि, प्रभावित लोगों का दावा है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी आम व्यक्ति द्वारा निर्धारित समय से बाहर ड्रिलिंग की जाए तो तुरंत चेतावनी या कार्रवाई हो जाती है, लेकिन बड़े निर्माण प्रोजेक्ट पर वही तत्परता नहीं दिखती।
कुछ निवासियों में यह धारणा भी बन गई है कि शिकायत करने पर उन्हें ही बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे वे आगे शिकायत करने से हिचकते हैं।
🏛️ प्रशासनिक जवाबदेही और सरकार से मांग
इस मुद्दे पर स्थानीय नागरिकों ने Maharashtra Government और संबंधित विभागों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- निर्माण कार्य के समय की स्पष्ट और सार्वजनिक सीमा तय हो।
- ध्वनि प्रदूषण मानकों की नियमित मॉनिटरिंग हो।
- नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए — चाहे आम नागरिक हो या बड़ा डेवलपर।
- शिकायतों पर पारदर्शी और लिखित जवाब दिया जाए।
📢 “सिस्टम पर भरोसा घटा” — जनता की आवाज
जनकल्याण नगर के कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने कई बार मुद्दा उठाया, मीडिया में प्रकाशित भी हुआ, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा।
निवासियों के अनुसार, यदि प्रशासन चाहे तो मीडिया में उठे मुद्दों का स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकता है। लेकिन जब ऐसा नहीं होता, तो लोगों में यह संदेश जाता है कि उनकी आवाज़ अनसुनी की जा रही है।
कई लोगों ने यह भी कहा कि वे टकराव से बचना चाहते हैं और इसलिए औपचारिक शिकायत से दूरी बना लेते हैं। इससे व्यवस्था पर भरोसा और कमज़ोर होता है।
⚖️ बड़ा सवाल
यह मामला केवल शोर का नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही का है।
क्या ध्वनि प्रदूषण के नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे?
क्या शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी?
और क्या स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी?
निष्कर्ष
मलाड वेस्ट के जनकल्याण नगर में जारी यह विवाद अब केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रहा। यह प्रशासन, पुलिस और नियामक संस्थाओं की भूमिका पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग क्या ठोस कदम उठाते हैं — ताकि विकास और नागरिकों की शांति, दोनों के बीच संतुलन कायम किया जा सके।













