मुंबई/वशिष्ठ वाणी: देश की आर्थिक राजधानी में पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ अब आम जनता के बजाय रसूखदारों और शोरूम मालिकों की जागीर बन चुके हैं। वशिष्ठ वाणी (Vashishtha VANI) द्वारा पिछले एक महीने से गोरेगांव और मलाड वेस्ट के इलाकों में अवैध पार्किंग का मुद्दा उठाए जाने के बावजूद, प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
दिखावे की कार्रवाई, धरातल पर शून्य
जब इस विषय पर मुंबई आरटीओ (RTO) के अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “हमने गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस को सूचित कर दिया है और वे कार्रवाई करेंगे।” लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। हफ्तों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इन जगहों पर उड़ रही हैं नियमों की धज्जियाँ
- जैन सबकुछ फूड प्लाजा (Jain Subkuch Food Plaza): यहाँ ग्राहकों और डिलीवरी वाहनों की अवैध पार्किंग ने फुटपाथ को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।
- हुंडई (Hyundai) और MG कार शोरूम: गोरेगांव स्थित इन नामचीन शोरूम्स के बाहर नई और पुरानी गाड़ियां फुटपाथ पर सजाकर खड़ी की जाती हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शोरूम मालिकों और अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है, जिसके कारण इन पर कोई हंटर नहीं चलता।
क्या मंत्रियों के संरक्षण में फल-फूल रहा है अवैध धंधा?
जनता के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर किसके दबाव में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस मौन है? चर्चा है कि इन इलाकों में होने वाली अवैध पार्किंग से मिलने वाले ‘कमीशन’ की कड़ियाँ ऊपर बैठे सफेदपोशों तक जुड़ी हैं। यही कारण है कि वशिष्ठ वाणी की ग्राउंड रिपोर्ट में बार-बार खुलासे होने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी केवल फाइलें घुमाने में लगे हैं।
आम जनता का फूटा गुस्सा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें आरटीओ द्वारा केवल बेवकूफ बनाया जा रहा है। एक तरफ सरकार ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘ईज ऑफ वॉकिंग’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ गोरेगांव जैसे प्रमुख इलाकों में फुटपाथों को शोरूम के एक्सटेंशन के रूप में इस्तेमाल करने की खुली छूट दी गई है।
निष्कर्ष: यदि जल्द ही इन भ्रष्ट अधिकारियों और नियम तोड़ने वाले शोरूम मालिकों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुंबई का प्रशासन कानून से नहीं, बल्कि रसूख और रुपयों के दम पर चल रहा है।













