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वशिष्ठ वाणी महा-खुलासा: 19 दिन… शून्य कार्रवाई! क्या अधिकारी कुंदन वळवी माफिया के साथ मिलीभगत में हैं?

मुंबई: मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माण पर ‘वशिष्ठ वाणी’ की जंग आज 19वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन मुंबई के इस हिस्से में कानून का इकबाल खत्म होता नजर आ रहा है। प्रशासन की बेशर्मी और अधिकारियों की कायरता का ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया, जहाँ 19 दिनों की निरंतर रिपोर्टिंग के बाद भी परिणाम ‘शून्य’ है।


कुंदन वळवी: जनता के सेवक या माफिया की कठपुतली?

‘वशिष्ठ वाणी’ लगातार उस आधिकारिक नोटिस (21 मई 2025) को उजागर कर रहा है, जिसे जारी हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। बावजूद इसके, बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • सबूतों के बाद भी मौन क्यों?: व्हाट्सएप पर अवैध निर्माण के पुख्ता सबूत और न्यूज़ डिटेल्स भेजने के बाद भी अधिकारी की कलम क्यों नहीं चली?
  • भ्रष्ट मिलीभगत का संदेह: क्या कुंदन वळवी जनता के प्रति जवाबदेह हैं या माफिया ‘कर्सन’ के रसूख के आगे नतमस्तक हो चुके हैं?

रेलवे सुरक्षा से खिलवाड़ और प्रशासन का ‘मजाक’

मालाड के मालाड वार्ड 35 क्षेत्र के पास स्थित यह ‘कोयला वाली गली’ रेलवे सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देना है। अधिकारी कुंदन वळवी की वजह से आज कानून का मखौल बन गया है।

वशिष्ठ वाणी की अंतिम चेतावनी: अब होगा कोर्ट में फैसला!

अधिकारी कुंदन वळवी शायद यह भूल गए हैं कि सरकारी कुर्सी पर बैठकर माफियाओं को संरक्षण देना उनके पद की गरिमा के खिलाफ है। वशिष्ठ वाणी की टीम ने अब सीधे संघर्ष का रास्ता चुन लिया है:

  1. कुर्सी छोड़ें या काम करें: अधिकारी तत्काल अपनी ‘कुर्सी गर्म’ करना बंद करें और ‘कोयला वाली गली’ के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाएं।
  2. कोर्ट का दरवाजा: अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मामले को माननीय न्यायालय (Court) तक ले जाएगी।
  3. सख्त संदेश: हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिकारी कुंदन वळवी को यह पता चले कि कानून से बड़ा कोई ‘कर्सन’ या अधिकारी नहीं होता।

“जब कलम माफिया के दबाव में रुक जाए, तो वशिष्ठ वाणी उसे चलाने के लिए मजबूर करना जानती है।”

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