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वशिष्ठ वाणी की कलम का जोरदार असर: SRA के सीईओ महेंद्र कल्याणकर ने तोड़ी चुप्पी, बिल्डर से वसूली के लिए BMC को भेजा पत्र!

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): ‘वशिष्ठ वाणी’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता में वो ताकत है, जो फाइलों की धूल झाड़कर प्रशासन को काम करने पर मजबूर कर देती है। मालाड मालवणी गेट नंबर ८ स्थित स्टैंस बिल्डटेक रियलिटी (Stans Buildtech Realty) द्वारा बीएमसी का रास्ता तोड़कर अवैध पाइपलाइन डालने का मामला, जो महीनों से एसआरए (SRA) और बीएमसी (BMC) के बीच ‘फुटबॉल’ बना हुआ था, अब एक निर्णायक मोड़ पर आ चुका है।

खबर का असर: सीईओ महेंद्र कल्याणकर ने लिया संज्ञान

‘वशिष्ठ वाणी’ ने जब इस मुद्दे पर एसआरए के सबसे बड़े अधिकारी—सीईओ महेंद्र कल्याणकर को घेरा और उनके कार्यालय से जवाब मांगा, तो प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूट गई। खबर प्रकाशित होने के मात्र १२ घंटों के भीतर ही, सीईओ महेंद्र कल्याणकर ने सक्रियता दिखाते हुए मामले की फाइल खुलवाई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए और बीएमसी को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया कि—“रोड बीएमसी का है, इसलिए ८६,४४,१८८ रुपये की वसूली की जिम्मेदारी बीएमसी प्रशासन की है।”


इस त्वरित कार्रवाई के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने एसआरए सीईओ महेंद्र कल्याणकर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “जब तक ऐसे अधिकारी पद पर हैं, तब तक आम जनता को न्याय की उम्मीद बनी रहेगी।” ‘वशिष्ठ वाणी’ भी सीईओ कल्याणकर के इस कदम की सराहना करती है कि उन्होंने फाइल को आगे बढ़ाया और कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया।

अब असली परीक्षा: क्या आनंद जाधव वसूलेंगे ८६ लाख?

एसआरए ने गेंद अब बीएमसी के पाले में डाल दी है। अब सवाल यह है कि बीएमसी में बैठे अधिकारी—आनंद जाधव (Anand Jadhav) क्या वाकई बिल्डर की अकड़ तोड़कर सरकारी खजाने में ८६ लाख ४४ हजार रुपये जमा करवा पाएंगे? या फिर यह मामला अब बीएमसी के दफ्तरों में ‘लेटर-लेटर’ खेलकर एक और साल तक टाला जाएगा?

पत्रकारिता का नया अध्याय: ‘वशिष्ठ वाणी’ है तो कार्रवाई मुमकिन है!

“आज के दौर में जब मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपना अस्तित्व खो चुका है और सरकारी दफ्तरों की फाइलों पर जमी धूल को हटाना किसी के बस की बात नहीं रही, तब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष पत्रकारिता आज भी जिंदा है। जहाँ लोग अब बड़ी मीडिया हाउसों से उम्मीद छोड़ चुके हैं, वहीं ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा उठाए गए हर अहम मुद्दे को आज बड़े-बड़े अधिकारी पूरी गंभीरता से ले रहे हैं।

यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि ‘वशिष्ठ वाणी’ के सवाल पूछते ही एसआरए जैसे महकमों में खलबली मच जाती है। हमने केवल खबरें नहीं छापी हैं, बल्कि जनता के उन सवालों को अंजाम तक पहुँचाया है, जिन्हें दबाने की कोशिश सालों से की जा रही थी। यह जीत सिर्फ ‘वशिष्ठ वाणी’ की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की है जो भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर न्याय की राह देख रहे थे। हम संकल्प लेते हैं कि जब तक मालाड, कांदिवली और मुंबई की सड़कों पर आम आदमी का हक सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यह कलम नहीं रुकेगी—क्योंकि ‘वशिष्ठ वाणी’ है, तो कार्रवाई मुमकिन है!”

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