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वर्दी का रौब या ‘पार्किंग’ का लोभ? एकता नगर में गैस सिलेंडर से भरी गाड़ियों को सतीश राउत का ‘अवैध वरदान’, क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): जहाँ ‘वशिष्ठ वाणी’ की एक खबर पर एसआरए (SRA) जैसे विभाग हिल जाते हैं और तुरंत कार्रवाई करते हैं, वहीं कंदिवली आरटीओ के सतीश राउत के कानों तक ‘जूं’ का पहुंचना तो दूर, उन्हें शायद ‘सुनाई’ ही नहीं देता। सतीश राउत साहब के राज में कंदिवली पश्चिम का एकता नगर रोड अब एक सड़क नहीं, बल्कि एक ‘निजी पार्किंग’ बन चुका है।

राउत साहब का ‘सरकारी झूठ’ और दस्तावेज़ों का रहस्य!

“सबसे ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि कंदिवली आरटीओ के सतीश राउत जनता और प्रशासन को सरेआम गुमराह करने में लगे हैं। जब भी उनसे इस अवैध पार्किंग के बारे में सवाल पूछा जाता है, तो वे बड़े दावे से कहते हैं कि—‘सड़क को गोदाम बनाने के लिए सरकार ने अनुमति दी है!’ लेकिन, जब ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने उनसे वह ‘जादुई दस्तावेज़’ मांगा, तो सतीश राउत के पास कोई जवाब नहीं था। न तो उन्होंने कोई अनुमति पत्र दिखाया और न ही कोई सरकारी आदेश प्रस्तुत कर पाए।

सतीश राउत साहब का यह व्यवहार यह स्पष्ट करता है कि वे अपनी वर्दी की आड़ में जनता को गुमराह कर रहे हैं। जिस अधिकारी को कानून का पालन कराने के लिए नियुक्त किया गया है, वही अधिकारी जब खुद कानून की धज्जियां उड़ाने और अपनी मनमानी को ‘सरकारी जामा’ पहनाने की कोशिश करे, तो यह गंभीर प्रशासनिक अपराध है। ‘वशिष्ठ वाणी’ चुनौती देती है कि यदि राउत के पास सड़क को गोदाम बनाने का कोई भी वैध दस्तावेज़ है, तो उसे सार्वजनिक करें। वरना, यह स्वीकार करना होगा कि वे किसी मिलीभगत के तहत अवैध पार्किंग को संरक्षण दे रहे हैं और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी अंधेरे में रख रहे हैं।”

एकता नगर: मौत के सिलेंडर और ‘राउत’ का खेल

एकता नगर रोड पर भारत गैस एजेंसी के डीलर ने सड़क को अपना गोदाम बना रखा है। २४ घंटे गैस सिलेंडरों से भरे वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं। जरा सोचिए, एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे इलाके को राख में बदल सकती है, लेकिन सतीश राउत और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को इससे क्या? उन्हें तो बस इस बात की चिंता है कि यह ‘पार्किंग का व्यापार’ कैसे बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

वशिष्ठ वाणी का सवाल: राउत साहब, अगर सड़क गोदाम है, तो क्या आम जनता के टैक्स से बनी सड़क आपकी व्यक्तिगत जागीर है? या आप आरटीओ अधिकारी होने के बजाय ‘अवैध पार्किंग माफिया’ के ‘ब्रांड एंबेसडर’ बन गए हैं?


वर्दी का मान या ‘पार्किंग’ का सम्मान?

यह शर्मनाक है कि एक आरटीओ अधिकारी अपनी वर्दी की गरिमा भूलकर सड़क को पार्किंग में बदलने की वकालत कर रहा है। जब-जब ‘वशिष्ठ वाणी’ सबूत मांगती है, साहब या तो खामोश हो जाते हैं या फिर टालमटोल शुरू कर देते हैं। उनके वरिष्ठ अधिकारी भी राउत साहब की गलतियों पर पर्दा डालने के लिए कमर कस कर बैठे हैं। लगता है, पूरे आरटीओ विभाग में अब ‘ट्रैफिक नियम’ नहीं, बल्कि ‘पार्किंग कमीशन’ के नियम चलते हैं।


‘वशिष्ठ वाणी’ सतीश राउत साहब को खुली चेतावनी देती है—यह जनता की सुरक्षा का मामला है, कोई हंसी-मजाक नहीं। यदि एकता नगर रोड पर खड़े इन गैस भरे वाहनों से कल को कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी सतीश राउत और उनके साथ खड़े वरिष्ठ अधिकारियों की होगी।

अब फैसला जनता को करना है कि वर्दी वाला यह अधिकारी ‘जनसेवक’ है या ‘पार्किंग दलाल’। वशिष्ठ वाणी की यह मुहिम तब तक नहीं रुकेगी, जब तक एकता नगर की सड़क आम नागरिकों के लिए खाली नहीं हो जाती।

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