मुंबई | मालाड (पश्चिम) | खोजी रिपोर्ट
गोरेगांव के डिप्टी कलेक्टर (उपजिलाधिकारी) विनायक पाडवी का ‘नया खेल’ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। मालाड पश्चिम के एरंगळ गांव में जो तमाशा चल रहा है, उसे देखकर मुंबई की जनता भी थू-थू कर रही है। जिस अवैध दीवार ने पीड़ित महिला नेहा निलेश वालावलकर का रास्ता रोक रखा है, उसे हाथ लगाने तक से पाडवी साहब के हाथ कांप रहे हैं! आखिर उस अवैध दीवार में किस बड़े नेता का ‘हाथ’ या ‘फोटो’ छिपा है, जिससे साहब इस कदर खौफ खाए बैठे हैं?
क्या है पूरा मामला? एक साल से न्याय के लिए भटक रही महिला
योगाश्रम, बुल्लर गार्डन, एरंगळ विलेज, दाणापाणी, मालाड (प.), मुंबई-400061 में रहने वाली पीड़ित महिला अधिकारी नेहा निलेश वालावलकर पिछले कई महीनों से अपने ही घर से बाहर निकलने के हक (राइट टू वे) के लिए सिस्टम के चक्कर काट रही हैं। दबंगों ने उनके घर का मुख्य रास्ता बीच में एक अवैध दीवार खड़ी करके पूरी तरह बंद (लॉक) कर दिया था। इस दबंगई के कारण पीड़ित महिला को अपना खुद का घर छोड़कर पूरे एक साल तक किराए के मकान में भटकने पर मजबूर होना पड़ा।
नया प्रशासनिक खेल: दीवार तोड़ने के बजाय दबंग के आगे जोड़े हाथ!

जब इस गंभीर मुद्दे को ‘वशिष्ठ वाणी’ ने प्रमुखता से उठाया, तो पाडवी साहब बड़ी-बड़ी बातें करते हुए, हाथ में बीएमसी का हथौड़ा लेकर लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंचे थे। जनता को लगा कि अब तो इंसाफ होगा और रास्ते की अवैध दीवार टूटेगी। लेकिन मौके पर पहुँचते ही पाडवी साहब ने दीवार को बचाने के लिए एक ‘नया खेल’ रच दिया!
साहब ने उस मुख्य अवैध दीवार को छूने से भी साफ मना कर दिया। उन्होंने वहाँ पास में ही सरकारी जमीन (Government Land) पर हुए एक दूसरे दबंग के अवैध कब्जे (जाली-घेरे) को देखा। साहब ने खुद माना कि यह जगह सरकारी है और इस पर अवैध कब्जा है। अब कायदे से तो साहब को तुरंत हथौड़ा चलाकर उस सरकारी जमीन के अवैध कब्जे को ध्वस्त कर देना चाहिए था और महिला को रास्ता दिलाना चाहिए था। लेकिन साहब ने गजब का दिमाग चलाया!

वे उस सरकारी जमीन को खाली कराने के बजाय, कब्जाधारी दबंग के आगे हाथ जोड़कर विनती करने लगे— “अरे भाई, तुमने सरकारी जमीन दबाई है तो क्या हुआ, इसी सरकारी जमीन में से थोड़ा सा रास्ता इस महिला को दे दो ना, ताकि हमें वो मुख्य अवैध दीवार न तोड़नी पड़े।”
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा प्रहार: पाडवी साहब, ये क्या नौटंकी चल रही है? सीधा कानूनन कार्रवाई करने और अवैध कब्जों को जड़ से उखाड़ने से आपको कौन रोक रहा है? आप डिप्टी कलेक्टर हैं या अवैध कब्जाधारियों के बीच सेटिंग कराने वाले कोई दलाल? मुख्य अवैध दीवार को बचाने के लिए दूसरी सरकारी जमीन के कब्जाधारी के आगे गिड़गिड़ाना, प्रशासनिक पद की सरेआम तौहीन है!
दीवार से मानसून का क्या लेना-देना साहब?
जब फोन कॉल पर ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने साहब को घेरा और पूछा कि दीवार तोड़ने में मानसून (बरसात) का बहाना क्यों बनाया जा रहा है, तो साहब फोन पर ही बगलें झांकने लगे।
- सवाल उठता है कि दीवार ढहाने से मानसून का क्या लेना-देना?
- क्या बरसात के पानी से सरकारी हथौड़े गल जाते हैं या फिर बीएमसी के मजदूरों को सर्दी लग जाती है?
- आप किसी गरीब का आशियाना या घर नहीं तोड़ रहे थे, बल्कि एक पीड़ित महिला का रास्ता रोककर खड़ी की गई अवैध दीवार को हटा रहे थे। लेकिन साहब को अचानक मानसून याद आ गया!
ऑन-कॉल रटते रहे— “नहीं-नहीं आज कार्रवाई होगी” और फिर कर दिया BLOCK!
‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम से फोन पर बात करते हुए पाडवी साहब लगातार एक ही रट लगाते रहे— “नहीं-नहीं, आप चिंता मत कीजिए, आज तो कार्रवाई होकर रहेगी, हम रास्ता दिलाएंगे।” लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो वह अवैध दीवार टूटी, न सरकारी जमीन का कब्जा हटा और न ही पीड़ित महिला को रास्ता मिला।
दबंग आज भी सीना ताने खड़े हैं और पाडवी साहब ने अपनी पोल खुलने के डर से ‘वशिष्ठ वाणी’ के ऑफिशियल नंबर को व्हाट्सएप पर ब्लॉक (Block) कर दिया है। नंबर ब्लॉक करके साहब अब मीडिया के सवालों से मुंह छिपाते फिर रहे हैं और फोन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
निष्कर्ष: नेताओं के आगे नतमस्तक सिस्टम!
विनायक पाडवी जी, व्हाट्सएप पर नंबर ब्लॉक करने से ‘वशिष्ठ वाणी’ का हौसला ब्लॉक नहीं होगा। आपकी यह कायरता, बहानेबाजी और सरकारी जमीन के कब्जाधारियों के आगे घुटने टेकने का यह पूरा खेल अब जनता की अदालत में आ चुका है। हम इस राजनीतिक और प्रशासनिक साठगांठ के खिलाफ तब तक लिखते रहेंगे, जब तक नेहा वालावलकर को उनका असली रास्ता नहीं मिल जाता!










