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वशिष्ठ वाणी एक्सक्लूसिव: माफिया ‘कर्सन’ के आगे नतमस्तक प्रशासन? आखिर नगरसेवक योगेश वर्मा की चुप्पी का राज क्या है?

मुंबई (मालाड): “मौन का अर्थ सहमति होता है”—यह कहावत आज मालाड वॉर्ड 35 की जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। भदरण नगर, रोड नंबर 1, रेलवे ट्रैक के पास स्थित ‘कोयला वाली गली’ में कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि गहरी नींद में सोए हुए हैं।

अवैध निर्माण का ‘किला’ और नगरसेवक का मौन

वशिष्ठ वाणी द्वारा सबूतों के साथ लगातार खुलासे किए जाने के बावजूद, बीजेपी के स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। क्षेत्र की जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है:

  • क्या सत्ता पक्ष का नगरसेवक होने के बावजूद आप भू-माफिया कर्सन के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ हैं?
  • जब महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार है और प्रशासन पर आपकी पकड़ होनी चाहिए, तो फिर ‘कोयला वाली गली’ में अवैध निर्माण किसकी शह पर हो रहा है?

जनता के चुभते सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रेलवे ट्रैक के पास यह अवैध ढांचा न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े खतरे को दावत दे रहा है। बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी की संदिग्ध भूमिका और अब नगरसेवक की चुप्पी ने ‘मिलीभगत’ के आरोपों को हवा दे दी है।

“वार्ड 35 की जनता ने आपको इसलिए चुना था ताकि क्षेत्र सुरक्षित रहे, न कि इसलिए कि माफिया यहाँ अपनी जागीर बना लें।”

वशिष्ठ वाणी की सीधी चुनौती

योगेश वर्मा जी, न्यूज़ में खबरें प्रकाशित होने का असर भले ही आप पर न पड़ रहा हो, लेकिन जनता की अदालत सब देख रही है। यदि आप वास्तव में अवैध निर्माण के खिलाफ हैं, तो सामने आकर स्पष्ट करें कि आपने अब तक बीएमसी कमिश्नर या सांसद पीयूष गोयल से इसकी लिखित शिकायत क्यों नहीं की?

क्या आप माफिया के साथ हैं या उस जनता के साथ जिसने आपको वोट देकर सदन में पहुँचाया? वशिष्ठ वाणी इस मामले में आपकी चुप्पी टूटने तक अपनी बेखौफ पत्रकारिता जारी रखेगा।


ब्यूरो रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी (सच्चाई के साथ, बेखौफ पत्रकारिता)

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