कांदिवली (पश्चिम): आज ‘वशिष्ठ वाणी’ कोई साधारण खबर नहीं, बल्कि एकता नगर के हजारों नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न उठा रहा है। एकता नगर की मुख्य सड़क, जो स्थानीय निवासियों के सुगम आवागमन और दैनिक यातायात के लिए बनाई गई थी, आज वह भारत गैस के सैकड़ों सिलेंडरों का ‘अवैध गोदाम’ बन चुकी है।

सत्ता और प्रशासन से ‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे सवाल:
- सड़क है या गैस यार्ड?सड़कें जनता के चलने और वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए होती हैं। क्या भारत गैस को यह अधिकार मिल गया है कि वह एक सार्वजनिक मार्ग को अपने व्यापारिक लाभ के लिए ‘खतरनाक पार्किंग’ में बदल दे?
- मुख्यमंत्री जी, क्या नियमों की बलि दी जा रही है? देवेंद्र फडणवीस जी, गृह विभाग आपके पास है। क्या एकता नगर में पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के नियमों का उल्लंघन आपकी जानकारी में है? रिहायशी इलाकों की मुख्य सड़कों पर इस तरह गैस से भरे ट्रकों का खड़ा होना कानूनन अपराध है। फिर भी कार्रवाई शून्य क्यों है?
- आम नागरिक की सुरक्षा का क्या?यह सड़क न केवल यातायात का माध्यम है, बल्कि आपातकालीन स्थिति (Emergency) में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए एकमात्र रास्ता भी है। इन सिलेंडरों के कारण होने वाले ‘ट्रैफिक जाम’ और ‘विस्फोट के खतरे’ के बीच आम आदमी की जान दांव पर लगी है।
रिहायशी इलाके में ‘मौत का साया’
एकता नगर एक सघन आबादी वाला क्षेत्र है। यहाँ की मुख्य सड़क से हर दिन हजारों कामकाजी लोग, स्कूल बसें और एम्बुलेंस गुजरती हैं। गैस सिलेंडर से लदे इन वाहनों की कतार न केवल यातायात बाधित करती है, बल्कि यह एक ‘पब्लिक सेफ्टी हजार्ड’ भी है। अगर यहाँ कोई भी छोटी दुर्घटना हुई, तो सघन आबादी होने के कारण बचाव कार्य नामुमकिन हो जाएगा।
“हम टैक्स देते हैं, डर में जीने के लिए नहीं!”
स्थानीय निवासियों का यह आक्रोश जायज है। जब प्रशासन अवैध पार्किंग पर डंडा चला सकता है, तो इन विशालकाय खतरनाक ट्रकों पर मेहरबान क्यों है?
वशिष्ठ वाणी का संकल्प
हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक एकता नगर की सड़कों को इन ‘चलते-फिरते बमों’ से मुक्त नहीं करा लिया जाता। प्रशासन अपनी ‘पावर’ का उपयोग जनता को सुरक्षा देने के लिए करे, न कि कंपनियों की अवैध गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए।
— ब्यूरो रिपोर्ट, वशिष्ठ वाणी














