मुंबई: मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध निर्माण का मामला अब गरमा गया है। वशिष्ठ वाणी की टीम ने जब इस लापरवाही पर सीधे बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी से जवाब मांगा, तो प्रशासन का डरपोक चेहरा सामने आया।
कर्सन का नाम सुनते ही काट दिया फोन!

हैरानी की बात यह है कि जब हमारी टीम ने अधिकारी कुंदन वळवी को फोन किया, तो पहले उन्होंने ऐसे जताया जैसे उन्हें इस अवैध निर्माण की जानकारी ही नहीं है। लेकिन जैसे ही भू-माफिया ‘कर्सन’ का नाम लिया गया, अधिकारी महोदय ने बिना जवाब दिए फोन काट दिया। आखिर इस नाम में ऐसा क्या है जो एक जिम्मेदार BMC अधिकारी के हाथ-पांव फुला रहा है? क्या कुंदन वळवी कानून से ज्यादा ‘कर्सन’ के प्रति जवाबदेह हैं?

‘वशिष्ठ वाणी’ की सीधी चेतावनी: कुर्सी गर्म न करें, कर्तव्य निभाएं
फोन कटने के बाद वशिष्ठ वाणी की टीम रुकी नहीं। हमने अधिकारी को व्हाट्सएप पर सभी न्यूज़ डिटेल्स और सबूत भेजकर उनके कर्तव्यों की याद दिलाई है। अधिकारी को स्पष्ट संदेश दिया गया है:
- कानून का मजाक न बनाएं: आपके ढीले रवैये के कारण अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
- अंतिम चेतावनी: अगर जल्द ही ‘कोयला वाली गली’ के अवैध निर्माण पर बीएमसी का हथौड़ा नहीं चला, तो वशिष्ठ वाणी की टीम कोर्ट (न्यायालय) का दरवाजा खटखटाएगी।
नगरसेवक योगेश वर्मा और प्रशासन की मिलीभगत?
एक तरफ नगरसेवक योगेश वर्मा की 16 दिनों की रहस्यमयी चुप्पी और दूसरी तरफ अधिकारी का कॉल काटना, यह साफ दर्शाता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। सांसद पीयूष गोयल के क्षेत्र में एक अधिकारी का ऐसा व्यवहार प्रशासन की साख पर बड़ा धब्बा है।
“कुंदन वळवी जी, याद रहे कि आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं, वह जनता की सेवा के लिए है। कानून से बड़ा कोई नहीं है, और वशिष्ठ वाणी आपको यह एहसास कराकर ही दम लेगी।”










