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गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार, 24 घंटे में 28 सेंटीमीटर बढ़ा पानी; तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता

अस्सी घाट का मंच डूबा, कई निचले इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी; वरुणा किनारे भी हालात बिगड़े, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

वाराणसी। गंगा और वरुणा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने वाराणसी के तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट गेज स्टेशन पर गुरुवार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 70.56 मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से करीब 29.8 सेंटीमीटर ऊपर है। गंगा के जलस्तर में लगातार करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की वृद्धि बताई जा रही है। पिछले 24 घंटे में जलस्तर करीब 28 सेंटीमीटर बढ़ा है।

गंगा का खतरे का निशान 71.262 मीटर है। इस लिहाज से मौजूदा जलस्तर खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन जिस गति से पानी बढ़ रहा है, उससे तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

सुबह 8 बजे तक वाराणसी में 28.2 मिलीमीटर बारिश भी दर्ज की गई। बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर का दोहरा असर अब घाटों के आसपास के निचले क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।

अस्सी घाट पर मंच डूबा, प्रवेश पर रोक

गंगा का पानी अस्सी घाट पर लगातार ऊपर बढ़ रहा है। सुबह-ए-बनारस का मंच करीब पांच फीट पानी में डूब चुका है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग कर लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।

पुराने अस्सी घाट की तरफ भी पानी सड़क की ओर बढ़ रहा है। अस्सी घाट, रविदास घाट और तुलसी घाट पर स्नान पर रोक लगाए जाने के बाद बाहर से आने वाले कई श्रद्धालु सामनेघाट के नए पक्के घाट की ओर पहुंच रहे हैं।

नगवा में बढ़ा खतरा, दर्जनों परिवारों पर नजर

नगवा नाले के आसपास भी पानी लगातार बढ़ रहा है। नगवा रामेश्वर मठ के पीछे जाने वाले रास्ते तक पानी पहुंचने लगा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो नगवा सोनकर बस्ती और हरिजन बस्ती के कई परिवारों को राहत शिविरों में भेजने की जरूरत पड़ सकती है।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले परिवार जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

गंगोत्री बिहार कॉलोनी और सामनेघाट में पहुंचा पानी

गंगोत्री बिहार कॉलोनी की लेन नंबर एक के नीचे तक गंगा का पानी पहुंचने लगा है। सामनेघाट में अघोर आश्रम के आसपास के निचले हिस्सों में भी पानी भर गया है।

सामनेघाट तिराहे से पीएसी कैंप की ओर जाने वाले मार्ग पर पानी लगातार ऊपर बढ़ रहा है। वहीं सामनेघाट जज गेस्ट हाउस और नए पक्के घाट के सामने बनी बारादरी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।

गढ़वाघाट आश्रम के सामने पक्के घाट की मढ़ी भी पानी में डूब गई है। इससे घाटों पर होने वाली सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

ज्ञान प्रवाह नाले का चैनल गेट बंद

गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण ज्ञान प्रवाह नाला भी पानी से भर गया है। कॉलोनियों की ओर पानी जाने से रोकने के लिए चैनल गेट बंद कर दिया गया है।

वहीं कॉलोनियों की तरफ जमा पानी को मोटर पंप के जरिए बाहर निकालने की व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय स्तर पर स्थिति की निगरानी की जा रही है।

वरुणा नदी भी दिखा रही रौद्र रूप

गंगा के साथ-साथ वरुणा नदी का बढ़ता जलस्तर भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। हिदायत नगर और तालीमन नगर में कई घरों तक बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है।

नक्खी घाट और दीनदयालपुर में बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी वरुणा की बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। बेदौली, कोटवा और टड़िया के नदी किनारे वाले क्षेत्रों में किसानों की फसल पानी में डूबने लगी है। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

रमना में सब्जियों की फसल में घुसा पानी

रमना गांव में गंगा किनारे किसानों द्वारा उगाई गई सब्जियों की फसल में भी पानी पहुंचने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह डूब सकती है।

ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है।

अस्सी से डोमरी तक बढ़ रहा पानी

गंगा का पानी अब अस्सी से सामनेघाट और डोमरी तक निचले इलाकों और आबादी की तरफ बढ़ रहा है। घाटों के ऊपर पानी चढ़ने के साथ ही आसपास के रास्तों और निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है।

तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवार लगातार जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और संभावित खतरे को देखते हुए सतर्क हैं।

कानपुर बैराज से छोड़ा गया पानी बढ़ा सकता है दबाव

बाढ़ की स्थिति के बीच ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी भी चिंता बढ़ा रहा है। जानकारी के अनुसार पिछले 12 घंटे में कानपुर बैराज से करीब छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि इस पानी को वाराणसी तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लग सकते हैं।

यदि यह पानी वाराणसी पहुंचने तक गंगा का जलस्तर पहले से ऊंचा रहा, तो आने वाले दिनों में नदी के जलस्तर पर इसका अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

खतरे के निशान से नीचे, लेकिन लगातार बढ़ रहा जलस्तर

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। गुरुवार सुबह नदी का जलस्तर 70.56 मीटर दर्ज किया गया।

अर्थात गंगा फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चेतावनी स्तर पार कर चुकी है और लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है।

लगातार बारिश, 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर जलस्तर वृद्धि और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के सामने निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ सकती है।

फिलहाल गंगा और वरुणा के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और तटवर्ती इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

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