नई दिल्ली: आज पूरा देश उन तीन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। 23 मार्च का दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे और वीर अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दी थी।
वक्त से पहले दी गई थी फांसी
बहुत कम लोग जानते हैं कि इन तीनों क्रांतिकारियों को फांसी देने का समय 24 मार्च की सुबह तय किया गया था। लेकिन जेल के बाहर उमड़ती भीड़ और विद्रोह के डर से अंग्रेजों ने नियमों को ताक पर रखते हुए 23 मार्च की शाम 7:33 बजे ही इन्हें फांसी दे दी।
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इंकलाब जिंदाबाद के नारों से गूँजी थी जेल
जेल के वार्डन के मुताबिक, फांसी के चबूतरे की ओर बढ़ते हुए भी इन तीनों के चेहरों पर डर का नामोनिशान नहीं था। वे ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गाते हुए आगे बढ़े। उनका यह बलिदान आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की लौ जलाए हुए है।
आज के युवाओं के लिए संदेश
शहीद दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उन आदर्शों को याद करने का दिन है जिसके लिए इन वीरों ने अपनी जान दी। आज देशभर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर इन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।













