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खुली चुनौती: क्या ‘मोदी हुंडई’ के आगे BMC और ट्रैफिक पुलिस ने टेक दिए हैं घुटने?

मुंबई, मालाड (पश्चिम): मुंबई की सड़कों पर आम आदमी की गाड़ी अगर 5 मिनट के लिए नो-पार्किंग में खड़ी हो जाए, तो ट्रैफिक पुलिस का टोइंग वैन और भारी जुर्माना बिजली की रफ़्तार से पहुँच जाता है। लेकिन मालाड के न्यू लिंक रोड पर स्थित मोदी हुंडई (Modi Hyundai) शोरूम के लिए शायद कानून की किताबें अलग लिखी गई हैं।


खबर का असर शून्य, शोरूम की दबंगई चालू

लगातार मीडिया कवरेज और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद भी मोदी हुंडई प्रशासन की नाक के नीचे अपनी गाड़ियाँ बीच सड़क पर खड़ी कर रहा है। फुटपाथ तो छोड़िए, अब मुख्य सड़क का एक हिस्सा भी शोरूम की निजी जागीर बन चुका है।


प्रशासन से तीखे सवाल:

  1. BMC की चुप्पी का राज क्या है? क्या P-South Ward के अधिकारियों को यह अवैध कब्जा दिखाई नहीं देता, या वे जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं? ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने में इतनी देरी क्यों?
  2. गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की लाचारी: ट्रैफिक विभाग आखिर इस समस्या को ‘जड़ से खत्म’ करने में नाकाम क्यों है? क्या भारी भरकम शोरूम के मालिकों के रसूख के आगे ट्रैफिक के नियम बौने पड़ गए हैं?
  3. आम जनता का उत्पीड़न कब तक? पीक आवर्स में इस अवैध पार्किंग की वजह से लगने वाले जाम में घंटों तक आम मुंबईकर फंसता है। इसके तेल और समय की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है?

जनता की मांग: कार्रवाई कागजों पर नहीं, जमीन पर हो!

सोशल मीडिया पर लोग अब सीधे मुंबई ट्रैफिक पुलिस (@MTPHereToHelp) और मुख्यमंत्री कार्यालय से सवाल पूछ रहे हैं। जनता का साफ कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में यहाँ से गाड़ियाँ नहीं हटीं और शोरूम पर भारी जुर्माना नहीं लगाया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि विभाग और शोरूम के बीच ‘गहरा तालमेल’ है।

अल्टीमेटम: प्रशासन होश में आए, इससे पहले कि जनता का सब्र टूट जाए और इस अवैध पार्किंग के खिलाफ बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो।

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