अवैध गतिविधियों पर सवाल उठाने वाले पत्रकार को फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश का आरोप..

वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। वाराणसी जनपद के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में कथित तौर पर चल रही अवैध गतिविधियों को उजागर करने वाले स्थानीय हिंदी दैनिक से जुड़े पत्रकार पवन मिश्रा को फर्जी मुकदमे में फंसाने की साजिश रचे जाने के आरोप सामने आए हैं।

आरोप है कि पत्रकार पवन मिश्रा ने क्षेत्र में खुलेआम हो रही अवैध गतिविधियों—जैसे गांजा की बिक्री, अवैध खनन और लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं—को अपनी खबरों और सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर किया था। इसके बाद उन्हें दबाने और डराने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

हाल ही में बिहड़ा गांव में हनुमान जी की मूर्ति को खंडित कर दबंगों द्वारा कार में भरकर ले जाने की संवेदनशील घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस की कथित लचर कार्रवाई पर भी पत्रकार ने सवाल उठाए थे। इसके अलावा मिर्जामुराद थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर अवैध गांजा बिक्री का वीडियो वायरल करने और बहेड़वा गांव में हो रही आपराधिक घटनाओं की जानकारी लगातार पुलिस को देने के बावजूद, कार्रवाई के बजाय पत्रकार को ही टारगेट किए जाने का आरोप है।

पत्रकार पवन मिश्रा का कहना है कि वे हमेशा समाज के कमजोर और असहाय वर्ग के साथ खड़े रहे हैं तथा निष्पक्ष पत्रकारिता करते आए हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता की हत्या बाहुबली तत्वों द्वारा की गई थी, जिनकी सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों से गहरी सांठगांठ रही है। परिवार पर पूर्व में कई बार जानलेवा हमले, गोलीबारी और बमबाजी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे जुड़े मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं। कुछ आरोपी सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं और अब पुलिस की कथित मदद से उन्हें फर्जी मामलों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।

पवन मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा,
“क्या अपने परिवार पर हुए अत्याचार और जानलेवा हमलों की बात उठाना अपराध है? क्या पत्रकारिता के माध्यम से पुलिस की नाकामी और अवैध गतिविधियों को उजागर करना गुनाह है?”

भारतीय पत्रकार संघ का कड़ा विरोध

इस पूरे प्रकरण को लेकर भारतीय पत्रकार संघ में भारी आक्रोश है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद्र द्विवेदी, राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष अरुण द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष नरेंद्र (फून्नी) तिवारी, पूर्वांचल संरक्षक राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय, जिला अध्यक्ष संदीप दुबे, जिला प्रभारी हरीश सिंह सहित सैकड़ों पत्रकारों ने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

संघ ने चेतावनी दी है कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस महानिदेशक (DGP) और कमिश्नर से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच तथा दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई की मांग करेगा।

संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का हमला या दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्रकारों को डराने-धमकाने की मानसिकता रखने वालों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। यदि उत्पीड़न जारी रहा, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”

यह मामला न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।