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Malvani Police पर गंभीर सवाल: शोक में डूबे परिवार से कथित दुर्व्यवहार, महिला अधिकारी की कार्यशैली पर उठे प्रश्न

“जनता की सेवा” या “वर्दी का अहंकार”?

मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मुंबई के मालवणी पुलिस थाने (Malvani Police) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर परिवार अपनी बुजुर्ग सदस्य के निधन के दुख में डूबा था, वहीं दूसरी ओर जांच प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों का व्यवहार पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा साबित हुआ।


सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने मालवणी पुलिस थाने में कार्यरत पुलिस उपनिरीक्षक श्रद्धा खरे के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शैलेन्द्र नगरकर को लिखित शिकायत सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं।


क्या यही है “संवेदनशील पुलिसिंग”?

शिकायत के अनुसार, 14 मई 2026 को सम्राट बागुल की दादी स्वर्गीय शामलाबाई ज्ञानमोठे का आंबोजवाड़ी क्षेत्र में उपचार के दौरान निधन हो गया था। ADR प्रक्रिया के तहत जांच के लिए शताब्दी अस्पताल पहुंचीं पुलिस उपनिरीक्षक श्रद्धा खरे ने कथित तौर पर परिवारजनों से ऊंची आवाज में बात की और ऐसा व्यवहार किया, जिसे परिजन “अमानवीय” और “अहंकारी” बता रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक शोकाकुल परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया? क्या वर्दी पहनते ही संवेदनशीलता खत्म हो जाती है?

दस्तावेज कपाट में लॉक कर चले गए कॉन्स्टेबल?

मामला यहीं नहीं रुका। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 16 मई 2026 को कॉन्स्टेबल हैदर सय्यद अस्पताल के आवश्यक दस्तावेज संबंधित अधिकारी को सौंपने के बाद उन्हें कपाट में लॉक कर वहां से चले गए। इसके चलते मृतक के परिजनों को लगभग एक घंटे तक जरूरी कागजात के लिए अस्पताल और पुलिस प्रक्रिया के बीच भटकना पड़ा।

एक तरफ सरकार “जनता के लिए पुलिस” का नारा देती है, तो दूसरी तरफ ऐसे आरोप मुंबई पुलिस की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

“जनता टैक्स देती है, अपमान सहने के लिए नहीं”

सम्राट बागुल ने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के टैक्स के पैसों पर कार्य करते हैं, इसलिए नागरिकों के साथ नम्रता और संवेदनशीलता से व्यवहार करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सेवा रिकॉर्ड में नकारात्मक टिप्पणी और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

पुलिस आयुक्त के आदेशों का क्या हो रहा है?

मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन्द्र भारती समय-समय पर अधिकारियों को नागरिकों के साथ संवेदनशील और संयमित व्यवहार करने के निर्देश देते रहे हैं। लेकिन मालवणी पुलिस थाने से सामने आए इस कथित घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये निर्देश सिर्फ बैठकों और फाइलों तक सीमित हैं?

बड़ा सवाल

  • क्या शोक में डूबे परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या मुंबई पुलिस प्रशासन जनता के सम्मान को गंभीरता से लेगा?
  • या फिर यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

मुंबई अब जवाब मांग रही है।

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