- प्रहलाद पाण्डेय की रिपोर्ट
वाराणसी/वशिष्ठ वाणी।
काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाले भव्य आयोजन ‘काशी तमिल संगम 4.0’ के अंतर्गत 2 दिसंबर से 14 दिसंबर तक नमो घाट पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर द्वितीय पाली, वाराणसी के लगभग 50 विद्यार्थियों के समूह ने इन गतिविधियों में सक्रिय और उत्साहपूर्वक भाग लिया।
🌿 तमिल भाषा और काशी–तमिल संस्कृति की पाठशाला
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को तमिल भाषा की मूल शब्दावली, उच्चारण, अभिवादन शैली और व्याकरण की शुरुआती अवधारणाओं से परिचित कराया गया। साथ ही उन्हें तमिलनाडु के पारंपरिक परिधान, खान-पान, लोकगीत, लोकनृत्य, त्योहारों और रीति–रिवाजों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने काशी और तमिल संस्कृति की समानताओं और ऐतिहासिक संबंधों को समझा, जिससे दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच मौजूद सांस्कृतिक सेतु को करीब से महसूस किया।
📚 NBT India द्वारा साहित्यिक और रचनात्मक सत्र
नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया (NBT) की ओर से आयोजित विभिन्न शैक्षणिक सत्रों ने बच्चों को नई दुनिया से जोड़ दिया।
इनमें प्रमुख कार्यक्रम शामिल रहे—
✔ कहानी की दुनिया
बच्चों को कहानी लेखन, पात्र निर्माण और कथानक की कला समझाई गई। इंटरएक्टिव सेशंस ने विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच को और समृद्ध किया।
✔ थिएटर वर्कशॉप
थिएटर विशेषज्ञों ने बच्चों को अभिनय, संवाद कौशल, अभिव्यक्ति, मंच संचालन और टीमवर्क की बारीकियां सिखाईं।
वर्कशॉप के दौरान बच्चों की आत्मविश्वास और मंच-प्रस्तुति क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
✔ राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी (National e-Library)
डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी की सुविधाओं, पुस्तकों और शैक्षणिक संसाधनों की जानकारी दी गई।
बच्चों ने तकनीक आधारित अध्ययन पद्धति को बड़े उत्साह से अपनाया।
😊 बच्चों में दिखा उत्साह और सीखने की तीव्र इच्छा
पूरे कार्यक्रम के दौरान बच्चे तमिल भाषा और संस्कृति को सीखने के प्रति अत्यधिक उत्साहित दिखे। कई विद्यार्थियों ने पहली बार तमिल शब्द बोलने, लिखने और समझने का अनुभव किया।
उनके अनुसार यह कार्यक्रम न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि सांस्कृतिक रूप से प्रेरणादायक भी रहा।
👩🏫👨🏫 शिक्षकों की उपस्थिति और मार्गदर्शन
इस सीख–सत्र में विद्यालय के अध्यापक
- श्रीमती प्रज्ञा मिश्रा,
- श्री आर. के. सिंह,
- श्री नागेश कुमार, और
- श्रीमती प्रिंसी शर्मा
भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों को निरंतर प्रोत्साहित किया और गतिविधियों की निगरानी की।
शिक्षकों का कहना है कि “काशी तमिल संगम बच्चों को भारत की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को समझने का एक अनूठा अवसर देता है। यह कार्यक्रम वास्तव में विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक रहा।”
🌺 भारत की दो महान परंपराओं का संगम
काशी तमिल संगम का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक संबंधों को फिर से जीवंत करना है। इस वर्ष आयोजित 4.0 संस्करण में बच्चों की भागीदारी ने इस सांस्कृतिक आदान–प्रदान में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।


