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मुख्यमंत्री जी, जनता की ‘फरियाद’ के लिए है CMO का हैंडल या सिर्फ PM मोदी की ‘प्रशंसा’ के लिए? ‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल

मुंबई (विशेष ब्यूरो): लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनती है ताकि उनके सुख-दुख, बुनियादी समस्याओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुधारा जा सके। लेकिन वर्तमान डिजिटल युग में जब सरकारें ‘क्लिक पर समाधान’ का दावा करती हैं, तब जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ‘वशिष्ठ वाणी’ आज सीधे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एक बेहद महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ा सवाल पूछ रही है— आखिर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का आधिकारिक सोशल मीडिया (X/ट्विटर) अकाउंट किस उद्देश्य के लिए बनाया गया है?

क्या सिर्फ ‘पीएम मोदी के नेतृत्व में…’ बोलने के लिए है यह अकाउंट?

अगर आप मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सोशल मीडिया हैंडल्स को उठा कर देखें, तो वहां रोजाना विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ एक ही रट दिखाई देती है— “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में…”

सवाल यह उठता है कि क्या राज्य की जनता ने आपको इसलिए चुनकर सत्ता की कुर्सी पर बैठाया है कि आप सुबह से शाम तक केवल देश के प्रधानमंत्री को खुश करने में लगे रहें? क्या महाराष्ट्र का शासन-प्रशासन सिर्फ इस एक वाक्य के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है?

जनता की समस्याओं पर ‘कुकुरमुत्ते’ की तरह मौन क्यों?

आज मुंबई और पूरे महाराष्ट्र की जनता विभिन्न गंभीर मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और CMO को लगातार टैग करती है। चाहे वह:

  • अवैध निर्माण और भू-mafiaओं का बढ़ता आतंक हो (जैसे मालाड वेस्ट के भद्रन नगर में पिछले 53-56 दिनों से चल रहा विवाद),
  • सड़कों और फुटपाथों पर होने वाली अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हो (जैसे कांदिवली का एकता नगर रोड या न्यू लिंक रोड),
  • आधी रात को पुलिस थानों में मदद मांगने जाने वाली महिलाओं के साथ बदसलूकी का मामला हो (जैसे मालवणी पुलिस स्टेशन की घटना)।

इन तमाम गंभीर विषयों पर जब त्रस्त जनता और जागरूक मीडिया अधिकारी व सरकार को टैग करते हैं, तो मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई त्वरित कार्रवाई या संतोषजनक जवाब क्यों नहीं आता? आखिर क्यों जनता की शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?

जनता की फिक्र या केंद्रीय मंत्री बनने की ‘महत्वाकांक्षा’?

प्रशासन की इस कार्यशैली को देखकर अब आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राज्य सरकार ने यह मान लिया है कि जनता की समस्याओं को सुनने और उन्हें हल करने से ज्यादा जरूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश रखना है? क्या यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में दिल्ली की राजनीति का रास्ता साफ हो सके और केंद्र में मंत्री पद हासिल किया जा सके?

‘वशिष्ठ वाणी’ का स्पष्ट संदेश: मुख्यमंत्री जी, यह कमाल की व्यवस्था है कि जहां जनता अपनी बुनियादी सहूलियतों के लिए त्रस्त है, वहीं सरकार सिर्फ एक व्यक्ति की फिक्र में मग्न है। याद रखिए, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। अगर सोशल मीडिया और प्रशासनिक तंत्र का उपयोग जनता की समस्याओं के निवारण के लिए नहीं हो रहा है, तो यह जनता के जनादेश का सीधा अपमान है।

सरकार को अब अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। विज्ञापन और प्रशंसा के दौर से बाहर निकलकर ग्राउंड जीरो पर तड़प रही जनता की आवाज सुननी होगी, क्योंकि जनता बदलाव करना भी जानती है और हिसाब मांगना भी।

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