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पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का रुख स्पष्ट: शांति और संवाद ही समाधान, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च – Subrahmanyam Jaishankar

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना, संवाद को फिर से शुरू करना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने सोमवार को Parliament of India में इस विषय पर सरकार का रुख रखते हुए कहा कि भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है। भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है।

भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वहां स्थित भारतीय दूतावासों और मिशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराएं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निकासी योजना और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को भी तैयार रखे हुए है, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।

भारत की कूटनीतिक अपील

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान का समर्थक रहा है।

सरकार के अनुसार, भारत का प्रयास है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति स्थापित हो, जिससे वहां रहने वाले लाखों लोगों के साथ-साथ भारतीय नागरिक भी सुरक्षित रह सकें।

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