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असंतोष और दलबदल से घिरी जेजेपी, क्या हरियाणा में फिर चौंकाएंगे दुष्यंत चौटाला?

Haryana Assembly Election 2024: क्या दुष्यंत चौटाला की जेजेपी हरियाणा में फिर से कोई सरप्राइज दे सकती है? 2019 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपनी शुरुआत करने के बाद जब जेजेपी ने बीजेपी को सरकार बनाने में मदद की तब से इस क्षेत्रीय पार्टी को कई झटके लगे हैं.

चुनाव आयोग ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दिया है. चुनाव 1 अक्टूबर को होंगे. 36 वर्षीय दुष्यंत चौटाला पर फिर से सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, जो 2019 के चुनावों के बाद किंगमेकर के रूप में उभरे थे. उनकी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने भाजपा को गठबंधन सरकार बनाने में मदद की थी. लेकिन इस साल लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी द्वारा बाहर किए जाने और लगातार गिरते चुनावी ग्राफ के बीच, दुष्यंत के सामने एक बड़ी चुनौती है. 

सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच होने वाले सीधे मुकाबले में जेजेपी को अपनी जगह बनानी होगी. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप), इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) और जेजेपी अन्य पार्टियां हैं. 2019 में जेजेपी ने 14.9% वोट शेयर हासिल किया और 87 सीटों में से 10 पर जीत हासिल की. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में हरियाणा की सभी 10 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद उसे सिर्फ़ 0.87% वोट ही मिल पाए. इसके सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.

  • असंतोष और दलबदल से घिरी जेजेपी

दिसंबर 2023 में राजस्थान विधानसभा चुनावों में 19 उम्मीदवार उतारकर पूर्व सहयोगी बीजेपी को डराने की दुष्यंत की कोशिश ने भी पार्टी को शर्मसार कर दिया था. उसके सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. असंतोष और दलबदल से घिरी जेजेपी बिखरी हुई है. इसके 10 में से कम से कम पांच विधायकों ने बगावत कर दी है और भाजपा को समर्थन देने का वादा किया है. पार्टी ने दो विधायकों बरवाला विधायक जोगी राम सिहाग और नरवाना विधायक राम निवास को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता से संपर्क किया. हालांकि, कोई भी फैसला लिए जाने से पहले ही चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी. नारनौंद से राम कुमार गौतम, टोहाना से देवेंद्र सिंह बबली और गुहला से ईश्वर सिंह सहित जेजेपी के तीन अन्य विधायक विधानसभा के अंदर और बाहर दुष्यंत के मुखर आलोचक रहे हैं. 

  • कई वफादार ने पार्टी छोड़ी

अप्रैल में दुष्यंत को एक और झटका देते हुए जेजेपी के प्रदेश अध्यक्ष निशान सिंह ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए. शुक्रवार को जेजेपी के उकलाना विधायक अनूप धानक, जो दुष्यंत के पिता अजय चौटाला के वफादार हैं, ने भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ दी. जेजेपी के गठबंधन सरकार में शामिल होने के बाद 2019 में मंत्री बनाए गए धानक के भाजपा में शामिल होने की संभावना है.

  • चौटाला परिवार में अंदरूनी कलह

लोकसभा चुनाव में हार के तुरंत बाद जेजेपी की सभी इकाइयां भंग कर दी गईं. इसके बाद दुष्यंत, उनके पिता अजय चौटाला, जो जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पार्टी के अन्य नेताओं ने पार्टी का पुनर्गठन शुरू कर दिया. शुक्रवार को चुनाव आयोग द्वारा हरियाणा के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद जेजेपी ने अपने पुनर्गठन अभियान के तहत 50 पदाधिकारियों की सूची जारी की. पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो की शाखा जेजेपी की स्थापना 9 दिसंबर 2018 को चौटाला परिवार में अंदरूनी कलह के बाद हुई थी.

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