मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): मुंबई में नियम केवल आम आदमी के लिए हैं, रसूखदार बिल्डरों के लिए नहीं—यह साबित कर रहा है कांदिवली-मालाड वेस्ट का Dotom Sapphire प्रोजेक्ट। वशिष्ठ वाणी की पड़ताल में एक ऐसा सच सामने आया है जिसे सुनकर प्रशासन की नींद उड़ जानी चाहिए। यहाँ न केवल नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, बल्कि सबूत मिटाने के लिए तकनीकी धोखाधड़ी का भी सहारा लिया जा रहा है।
सत्ता और कानून को ‘ठेंगा’ दिखाने वाला काला सच:

- साजिश के तहत AQI मशीन बंद: बिल्डर ने बड़ी चालाकी से निर्माण स्थल पर लगी AQI (Air Quality Index) मॉनिटरिंग मशीन को बंद कर दिया है। मकसद साफ है—हवा में फैल रहे जहरीले धूल-कणों का डेटा रिकॉर्ड न हो सके। क्या यह प्रशासन की आंखों में सीधे तौर पर धूल झोंकना नहीं है?
- आधी रात को मौत का खेल: जहां पूरी मुंबई रात में सोती है, वहां डॉटम सफायर की साइट पर रात 12 से 1 बजे तक धड़ल्ले से भारी मशीनें चलती हैं। ध्वनि प्रदूषण और निर्माण नियमों को ताक पर रखकर यह बिल्डर अपनी तिजोरियां भरने में लगा है।

- 6 लाख का ‘डाका’: इस बिल्डर की हिम्मत देखिए, एक मध्यमवर्गीय ग्राहक का 6 लाख रुपये का बुकिंग अमाउंट दबाकर बैठा है और वापस करने के नाम पर धौंस दिखा रहा है।
- अधिकारी कुंदन वलवी की चुप्पी: संदेह के घेरे में?सबसे बड़ा सवाल BMC के अधिकारी कुंदन वलवी पर उठता है। क्या उन्हें यह अवैध काम दिखाई नहीं दे रहा? क्या बिल्डर के इस ‘अधर्म’ को उनका मूक समर्थन प्राप्त है?
वशिष्ठ वाणी का सीधा सवाल:
“क्या मुंबई का प्रशासन इस बिल्डर के सामने सरेंडर कर चुका है? क्या डॉटम सफायर पर Work Stop Notice जारी करने की हिम्मत BMC जुटा पाएगी या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?”
जनता की मांग:
इलाके के त्रस्त निवासियों ने मांग की है कि इस प्रोजेक्ट की तुरंत उच्च स्तरीय जांच हो, भारी जुर्माना लगाया जाए और बिल्डर की इस तानाशाही पर तुरंत लगाम कसी जाए।










