कांदिवली, मुंबई: कांदिवली (वेस्ट) के जनकल्याण नगर में डोटम ग्रुप (Dotom Group) द्वारा नियमों को ठेंगा दिखाकर देर रात तक निर्माण कार्य करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुंबई का प्रशासन महज मूकदर्शक बना रहेगा या कानून का उल्लंघन करने वाले इस बिल्डर पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?

खबर के मुख्य अंश:
- आधी रात का शोर: 16 अप्रैल को रात 1 बजे तक और 17 अप्रैल को रात 12 बजे तक लगातार काम जारी रहा। मशीनों के शोर ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों की नींद हराम कर दी।
- कानून से ऊपर बिल्डर? निवासियों का सीधा आरोप है कि डोटम ग्रुप खुद को कानून से बड़ा समझता है। क्या “पैसे के दम पर कानून को मोड़ने” की बिल्डर की यह धारणा सही साबित होगी?
- मजदूरों का शोषण: निर्माण कार्य की समय सीमा (रात 10 बजे तक) का उल्लंघन करते हुए मजदूरों से भी रात-रात भर काम कराया जा रहा है।
प्रशासन से जनता के सीधे सवाल:
- क्या BMC लाइसेंस रद्द करेगी? बार-बार नियमों को तोड़ने वाले बिल्डर का निर्माण लाइसेंस (IOD/CC) तुरंत प्रभाव से रद्द क्यों नहीं किया जा रहा?
- मुंबई पुलिस की चुप्पी कब टूटेगी? ध्वनि प्रदूषण और तय समय सीमा के उल्लंघन पर क्या पुलिस FIR दर्ज कर बिल्डर को कड़ा संदेश देगी?
- दबदबा या इंसाफ? क्या जनकल्याण नगर की जनता को बिल्डर के “दबदबे” के आगे घुटने टेकने पड़ेंगे या प्रशासन आम आदमी के साथ खड़ा होगा?
स्थानीय निवासियों की मांग: “हमें उम्मीद है कि इस खबर के बाद प्रशासन की नींद खुलेगी। अगर डोटम ग्रुप पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि मुंबई में बिल्डर लॉबी कानून से ऊपर है।”










