मुंबई (मालाड): मुंबई की मेयर रितु तावड़े जी, ‘वशिष्ठ वाणी’ आज आपसे सीधे जवाब मांगती है। मालाड वेस्ट के भाद्रन नगर (वार्ड 35) में रेलवे सुरक्षा दीवार के साथ सटकर माफियाओं ने अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया है, लेकिन बीएमसी के संबंधित अधिकारी कुंदन वळवी के हाथ क्यों बंधे हुए हैं? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या रेल हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
रसूख के आगे नतमस्तक अधिकारी?
खबर हैरान करने वाली है—एक तरफ देश की सुरक्षा और रेलवे ट्रैक की मर्यादा है, तो दूसरी तरफ भू-माफियाओं का अवैध निर्माण। बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी को इस बारे में कई बार सूचित किया गया, लेकिन उनका ‘मौन’ उनकी कार्यप्रणाली पर कालिख पोत रहा है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि वळवी का बुलडोजर माफियाओं की चौखट पर जाकर थम जाता है?

क्या BMC के ‘वर्दीधारी’ दे रहे हैं अवैध निर्माण को संरक्षण?
विरोध किया तो जानलेवा हमला: प्रशासन की चुप्पी का नतीजा!

जब सिस्टम सो जाता है, तब माफिया जाग जाता है। इस अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने वाले पूर्व बीजेपी वार्ड अध्यक्ष जिग्नेश परमार पर भू-माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया। मेयर महोदया, क्या मुंबई में अब सच बोलना जान को खतरे में डालना है? जिग्नेश परमार पर हुआ हमला यह साबित करता है कि माफियाओं को प्रशासन और पुलिस की सुस्ती का पूरा भरोसा है।
वशिष्ठ वाणी की दो-टूक चेतावनी:
मेयर रितु तावड़े जी, आपको यह स्पष्ट कर दें कि ‘वशिष्ठ वाणी’ केवल समाचार प्रकाशित करने वाला माध्यम नहीं है, बल्कि हम जनता के हक के लिए माननीय न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने से भी पीछे नहीं हटते। हमारा सवाल साफ है:
- क्या बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी को उनके पद से तत्काल हटाया जाएगा?
- क्या रेलवे ट्रैक के पास हुए उस अवैध निर्माण को 24 घंटे के भीतर जमींदोज किया जाएगा?
निष्कर्ष: अगर प्रशासन और मेयर कार्यालय इस गंभीर विषय को ‘हल्के’ में लेते हैं, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इस लड़ाई को कोर्ट रूम तक ले जाएगी। माफियाओं के अवैध किले को ढहाने तक हमारा यह अभियान रुकने वाला नहीं है।













