कांदिवली ट्रैफ़िक विभाग और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सीधा सवाल: क्या २५ हजार जिंदगियों की कोई कीमत नहीं है?
मुंबई (वशिष्ठ वाणी): कांदिवली का एकता नगर रोड इस समय एक बड़े और भयानक हादसे के मुहाने पर बैठा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ आज एक बार फिर स्थानीय ट्रैफ़िक विभाग के अधिकारियों और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से सीधे और तीखे सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब खाली होगा यह रास्ता? कब हटेंगे इस सड़क से भारत गैस के सिलेंडरों से भरे ये भारी वाहन? क्या शासन और प्रशासन इतना व्यस्त हो चुका है कि उसे यहाँ रहने वाले हजारों मासूम लोगों की जान की कोई परवाह ही नहीं है?
हादसे का इंतजार या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की तैयारी?

सड़क पर सरेआम गैस सिलेंडरों से भरे वाहनों को पार्क करके इसे एक खुला गोदाम बना दिया गया है। ऐसा लगता है कि स्थानीय प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। या फिर अधिकारियों ने पहले से ही यह सोच रखा है कि अगर कोई बड़ा हादसा हुआ, तो सारा ठीकरा सीधे भारत गैस एजेंसी पर फोड़कर खुद का पल्ला झाड़ लेंगे और अपनी पीठ छुड़ा लेंगे!
प्रशासन का यह रवैया जनता की सुरक्षा के साथ एक भद्दा मजाक है। अधिकारी यह सोचने को तैयार ही नहीं हैं कि अगर किसी ने भी यहाँ एक छोटी सी भी लापरवाही या शरारत कर दी, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है।
२५ हजार आबादी के साथ खिलवाड़ क्यों?
- जनसंख्या का दबाव: एकता नगर रोड के आसपास लगभग २० से २५ हजार लोग रहते हैं। यह एक बेहद घनी आबादी वाला क्षेत्र है।
- असुरक्षित गोदाम: आखिर भारत गैस को सड़क को ही अपना गोदाम बनाने की जिद क्यों है? क्या उनके पास कोई और सुरक्षित जगह नहीं है?
- अधिकारियों की चुप्पी: इतनी बड़ी आबादी के सिर पर चौबीसों घंटे खतरा मंडरा रहा है, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को इसकी जरा भी चिंता नहीं है।
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: > “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जी, इस घनी आबादी की चीख और खतरा आपके कानों तक कब पहुंचेगा? क्या मुंबई के नागरिकों को सुरक्षित माहौल देना आपकी प्राथमिकता में शामिल नहीं है?”
भारत गैस एजेंसी अपने व्यावसायिक फायदे के लिए किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर अपना गोदाम क्यों नहीं ढूंढ रही, जहाँ किसी की जान को खतरा न हो? ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे पर तब तक अपनी आवाज उठाता रहेगा, जब तक कि कांदिवली ट्रैफ़िक विभाग और राज्य सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती और एकता नगर रोड को इस बड़े खतरे से मुक्त नहीं कराती।













