मुंबई: मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ की जंग आज 18वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि 18 दिन बीत जाने के बाद भी शासन और प्रशासन के खाते में ‘शून्य कार्रवाई’ दर्ज है।
बीएमसी अधिकारी की संदिग्ध भूमिका?

वशिष्ठ वाणी लगातार उस नोटिस को उजागर कर रहा है जो 21 मई 2025 को जारी किया गया था। आज एक साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन पी/उत्तर (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी की चुप्पी और उनकी कलम की सुस्ती कई अनसुलझे सवाल खड़े कर रही है। क्या बीएमसी के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, या ‘खास’ लोगों के लिए कानून के तराजू बदल जाते हैं?

नगरसेवक योगेश वर्मा से तीखे सवाल
जनता आज अपने प्रतिनिधि की ओर देख रही है, लेकिन बदले में सिर्फ ‘रहस्यमयी चुप्पी’ मिल रही है।
- नगरसेवक योगेश वर्मा जी, क्या 18 दिन का समय एक अवैध निर्माण पर संज्ञान लेने के लिए काफी नहीं है?
- आपकी यह खामोशी क्या क्षेत्र की जनता के प्रति आपकी जवाबदेही पर सवालिया निशान नहीं लगाती?
- ‘कोयला वाली गली’ की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी आखिर क्या है?
सांसद पीयूष गोयल के क्षेत्र में नियमों की धज्जियाँ
यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा (रेलवे) से भी जुड़ा है। ऐसे में सांसद पीयूष गोयल के संसदीय क्षेत्र में नियमों का इस तरह सरेआम मखौल उड़ना बेहद चिंताजनक है। वशिष्ठ वाणी पूछता है—आखिर ‘कर्सन’ को किसका अभयदान प्राप्त है? किसके दबाव में बीएमसी का बुलडोजर रास्ता भटक गया है?
वशिष्ठ वाणी का संकल्प:
हमारी रिपोर्टिंग का आज 18वां दिन है और जब तक प्रशासन हरकत में नहीं आता, हमारी आवाज कम नहीं होगी। ‘कोयला वाली गली’ के इस अवैध निर्माण को उसके अंजाम तक पहुँचाना ही वशिष्ठ वाणी का लक्ष्य है।











