मुंबई: मुंबई के व्यस्ततम चौराहे, मिठ चौकी (Mith Chauki) और काचपाड़ा (Kachpada) इन दिनों विज्ञापन और राजनीतिक बैनरों के जंगल बन चुके हैं। ट्रैफिक सिग्नल के खंभों से लेकर डिवाइडर तक, शायद ही कोई ऐसी जगह बची है जहाँ अवैध बैनर न टंगे हों। इस गंभीर विषय पर जनता अब BMC से सीधे सवाल पूछ रही है।
कानून की स्पष्ट लक्ष्मण रेखा
‘महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट’ (संपत्ति विरूपण अधिनियम) के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति बैनर लगाना अपराध की श्रेणी में आता है। बॉम्बे हाई कोर्ट के सख्त आदेशों के मुताबिक:

- 25 मीटर का घेरा: किसी भी ट्रैफिक सिग्नल या जंक्शन के 25 मीटर के दायरे में बैनर लगाने की अनुमति देना कानूनन वर्जित है।
- जुर्माने का प्रावधान: अवैध बैनर पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था पर ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- जेल की सजा: नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर 3 महीने तक की कैद का भी प्रावधान है।
अनुमति का सच: क्या सिग्नल पर बैनर लगाना मुमकिन है?
आम जनता के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बीएमसी से अनुमति लेकर सिग्नल पर बैनर लगाया जा सकता है? इसका जवाब है— नहीं।
बीएमसी (BMC) की एडवरटाइजिंग पॉलिसी और ट्रैफिक पुलिस के नियम ड्राइवरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। सिग्नल पर बैनर लगाने से ड्राइवरों का ध्यान भटकता है और ट्रैफिक लाइट्स छिप सकती हैं, इसलिए प्रशासन यहाँ बैनर लगाने की Permission (अनुमति) कभी नहीं देता। इसका मतलब है कि मिठ चौकी और काचपाड़ा सिग्नल पर लगे तमाम बैनर पूरी तरह अवैध हैं।
BMC की कार्यशैली पर कड़े सवाल
अक्सर देखा जाता है कि बीएमसी की टीम आती है, बैनर फाड़ती है और गाड़ी में भरकर ले जाती है। लेकिन क्या यह काफी है?
- पल्ला झाड़ना: क्या बैनर हटा देना ही बीएमसी की एकमात्र जिम्मेदारी है?
- जुर्माना क्यों नहीं?: बैनरों पर साफ-साफ आयोजकों के नाम और फोटो होते हैं, फिर भी उन पर भारी जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाता?
- FIR की कमी: कोर्ट के आदेश के बावजूद, इन अवैध विज्ञापनकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज करने में ढिलाई क्यों बरती जाती है?
जनता का तीखा सवाल
“मिठ चौकी और काचपाड़ा सिग्नल पर जो लोग अवैध बैनर लगाकर शहर की सूरत बिगाड़ रहे हैं और नियमों को ताक पर रख रहे हैं, क्या बीएमसी उन पर कानून के मुताबिक भारी जुर्माना लगाएगी? या फिर प्रशासन हर बार की तरह सिर्फ बैनर हटाकर अपना पल्ला झाड़ लेगा और उल्लंघन करने वालों को फिर से वही गलती करने की खुली छूट देगा?”
निष्कर्ष: अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल ‘सफाई’ न करे, बल्कि ‘कार्रवाई’ भी करे। जब तक आयोजकों की जेब से जुर्माने की रकम नहीं निकलेगी, तब तक मुंबई के सिग्नल इन अवैध बैनरों से मुक्त नहीं होंगे।
— आपकी आवाज़, समाचार डेस्क










