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16 दिन… शून्य कार्रवाई! आखिर कब तक मौन रहेंगे नगरसेवक योगेश वर्मा?

मुंबई: ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अवैध निर्माण के खिलाफ छेड़ी गई जंग को आज 16 दिन पूरे हो चुके हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस लोकतंत्र में कानून का राज होना चाहिए, वहां आज भी अवैध निर्माण का ढांचा सीना ताने खड़ा है।


21 मई 2025 का वो नोटिस… जो फाइलों में दफन हो गया

‘वशिष्ठ वाणी’ लगातार उस सरकारी दस्तावेज (नोटिस) को जनता के सामने ला रहा है, जिसे 21 मई 2025 को जारी किया गया था। एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी की कलम कार्रवाई के लिए क्यों नहीं चली? क्या सरकारी नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए होते हैं या फिर पर्दे के पीछे कोई गहरी सांठगांठ है?


जनप्रतिनिधियों की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर सवाल

  • जब जनता की सुरक्षा और नियमों की बात आती है, तो हमारे चुने हुए प्रतिनिधि मौन क्यों हो जाते हैं?
  • सांसद पीयूष गोयल जी से सीधा सवाल: क्या आपके संसदीय क्षेत्र में नियमों की धज्जियाँ उड़ाना अब आम बात हो गई है? रेलवे सुरक्षा जैसा संवेदनशील मुद्दा आपकी प्राथमिकता में क्यों नहीं है?
  • नगरसेवक योगेश वर्मा कहाँ हैं? 16 दिनों से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा है, लेकिन वार्ड 35 के नगरसेवक ने अब तक इस पर कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया? क्या एक जनप्रतिनिधि के लिए 16 दिन का समय काफी नहीं है?

आखिर कौन है ‘कर्सन’ का रक्षक?

आज पूरा मालाड पूछ रहा है—’कर्सन’ को किसका संरक्षण प्राप्त है? आखिर वह कौन सा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है जिसके कारण बीएमसी का बुलडोजर ‘कोयला वाली गली’ का रास्ता भूल गया है? रेलवे ट्रैक के पास अवैध निर्माण न केवल एक कानूनी उल्लंघन है, बल्कि हजारों यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ भी है।

वशिष्ठ वाणी की चेतावनी: प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की यह खामोशी मिलीभगत का संकेत दे रही है। ‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी इस जंग को तब तक जारी रखेगा जब तक प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटती और ‘कोयला वाली गली’ के दोषियों पर हथौड़ा नहीं चलता।

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