मालाड (संवाददाता): मुंबई (Mumbai) के मालाड वेस्ट स्थित न्यू लिंक रोड (Malad New Link Road) पर ‘चावड़ा कमर्शियल सेंटर’ (Chawda Commercial Center) के बाहर ‘मोदी हुंडई शोरूम’ (Modi Hyundai Showroom) द्वारा की जा रही अवैध पार्किंग (Illegal Parking) अब आम जनता के लिए सिरदर्द और गोरेगांव ट्रैफिक विभाग (Goregaon Traffic Police Division) की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन चुकी है। 24 घंटे सार्वजनिक सड़क पर हुंडई की गाड़ियों का तांता लगा रहता है, जिसकी तस्वीरें और जमीनी हकीकत इस अवैध पार्किंग साम्राज्य की पोल खोल रही हैं।
रात में गायब, दिन में ‘रिक्वेस्ट मोड’ में पुलिस
क्षेत्रीय निवासियों और राहगीरों (Commuters) का आरोप है कि रात के समय जब इस मार्ग पर बेतरतीब गाड़ियां खड़ी कर पूरा रास्ता ब्लॉक (Road Blockade) कर दिया जाता है, तब गोरेगांव ट्रैफिक विभाग का कोई भी अधिकारी या जवान कार्रवाई के लिए मौके पर नजर नहीं आता। रात के अंधेरे में आखिर ट्रैफिक विभाग की गश्त (Police Patrolling) कहां गायब रहती है, यह बड़ा रहस्य बना हुआ है।
वहीं, दिन के समय जब परेशान नागरिक बार-बार शिकायतें (Public Complaints) दर्ज कराते हैं, तो पुलिस की टीम मौके पर पहुंचती तो है, लेकिन कार्रवाई का तरीका देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

चालान से डर, गाड़ियां हटवाने के लिए मिन्नतें!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर पहुंचने वाले ट्रैफिक अधिकारी नियम तोड़ने वालों पर सख्त चालान (Traffic Challan) ठोंकने, गाड़ियों को टो (Towing) करने या सीज करने का साहस तक नहीं जुटा पाते। इसके विपरीत, अधिकारी शोरूम कर्मचारियों के आगे हाथ जोड़कर ‘रिक्वेस्ट’ करते नजर आते हैं कि “भाई! गाड़ियां हटा लो, नहीं तो हमें मजबूरी में चालान काटना पड़ेगा।”
सोचिए, अगर सड़क पर 10 से 15 गाड़ियां अवैध रूप से कतार में लगी हैं, तो जब तक एक-एक करके सारी गाड़ियां हट नहीं जातीं, तब तक पुलिस बेचारगी के भाव में मिन्नतें करती रहती है। क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा अब सिर्फ मिन्नतें करने तक ही सीमित रह गई है?
प्रशासनिक संरक्षण से बुलंद हुए हौसले
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मोदी हुंडई शोरूम प्रबंधन से ‘कुछ ज्यादा ही दोस्ती’ निभा रहे हैं। कड़े एक्शन (Strict Legal Action) के अभाव में शोरूम प्रबंधन का बेखौफ रवैया दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
जैसे ही पुलिस की गाड़ी मिन्नतें करके वापस लौटती है, कुछ ही देर में गाड़ियां फिर से मुख्य मार्ग पर तनकर खड़ी हो जाती हैं।
बड़ा सवाल: सार्वजनिक सड़क को अपनी निजी जागीर समझने वाले इस शोरूम पर सख्त वैधानिक कार्रवाई कब होगी? क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग अपनी ‘दोस्ती’ निभाना छोड़कर कानून का राज कायम करेगा या जनता यूं ही रोज इस महाजाम (Traffic Jam) और अव्यवस्था को झेलने के लिए मजबूर रहेगी?












