मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): ग्राहकों को लुभावने विज्ञापन दिखाकर इंश्योरेंस पॉलिसी (Insurance Policy) बेचने वाली कंपनियां क्लेम पास करने के समय किस तरह अपनी जिम्मेदारी से भागती हैं और बदतमीजी पर उतर आती हैं, इसका एक चौंकाने वाला मामला मुंबई में सामने आया है। ‘गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस’ (Go Digit General Insurance Ltd.) के प्रतिनिधि ने मुंबई पुलिस विभाग (Mumbai Police) के एक कर्मचारी से फोन पर न सिर्फ अभद्रता की, बल्कि यह तक कह दिया कि “तुम्हें जहां शिकायत करनी है कर लो, हम वही करेंगे जो हमें सही लगेगा।”
5 साल की वैलिडिटी और Zero Dep Policy के बावजूद धोखा
बांगुर नगर पुलिस स्टेशन (Bangur Nagar Police Station) में कार्यरत पुलिसकर्मी श्री प्रकाश ज्योति चव्हाण (निवासी: न्यू पुलिस लाइन, मालाड वेस्ट) ने अप्रैल 2026 में एक नई रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 (Royal Enfield Classic 350 Stealth Black, 349 CC) मोटरसाइकिल खरीदी थी।
पॉलिसी दस्तावेज के अनुसार मुख्य तथ्य:
- पॉलिसी प्रकार: 5-Year Multi-Year Package Policy
(Validity: 18-APR-2026 to 17-APR-2031) - कुल भुगतान (Premium Paid): ₹22,904
- अतिरिक्त सुरक्षा (Add-on Cover): Nil Depreciation / Zero Depreciation (मेटल व प्लास्टिक पार्ट्स पर पूर्ण कवर)
- आधिकारिक क्लेम नंबर: 202601487943
गत 29 अक्टूबर की रात उन्होंने अपनी बुलेट हमेशा की तरह सोसाइटी के नीचे खड़ी की थी। अगली सुबह (30 अक्टूबर) देखने पर मोटरसाइकिल की पेट्रोल टैंक पर एक बड़ा डेंट (Deep Dent) दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत 30 अक्टूबर को ही गो डिजिट के कस्टमर केयर पर घटना की आधिकारिक शिकायत (Claim No. 202601487943) दर्ज कराई।
मौके पर पहुंचे बिना वीडियो कॉल पर ‘खानापूर्ति’
कंपनी की ओर से मैसेज भेजकर पीड़ित पुलिसकर्मी को स्वयं Self-survey करने को कहा गया। हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनी का कोई भी आधिकारिक सर्वेयर (Insurance Surveyor) गाड़ी की भौतिक जांच (Physical Inspection) करने मौके पर नहीं पहुंचा। 05 नवंबर को सिर्फ एक मोबाइल वीडियो कॉल (Video Call Inspection) के जरिए गाड़ी का मुआयना किया गया और Zero Dep Policy होने के बावजूद क्लेम के नाम पर कहा गया कि पेट्रोल टैंक को बदलने (Replace) के बजाय सिर्फ पेंट (Repaint) लगाकर दे दिया जाएगा।
“मैं ही अधिकारी हूँ, जो करना है कर लो” – सर्वेयर नाडर का अहंकार
वाहन बिल्कुल नया होने और टैंक पर गहरा डेंट होने के कारण पीड़ित पुलिसकर्मी ने गो डिजिट के सर्वेयर/एग्जीक्यूटिव नाडर (मोबाइल नंबर: 9665017571) से फोन पर बेहद नम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि नियम और गाड़ी की स्थिति के अनुसार पेट्रोल टैंक को बदल दिया जाए।
इस पर सहयोग करने के बजाय एग्जीक्यूटिव नाडर ने बदतमीजी से बात करना शुरू कर दिया:
- पुलिसकर्मी ने कहा:“मैं पुलिस विभाग में हूँ और आपसे सम्मानपूर्वक बात कर रहा हूँ। आप ग्राहक से इस तरह की भाषा में बात नहीं कर सकते।”
- सर्वेयर का जवाब:“हम इस तरह क्लेम पास नहीं करेंगे। तुम मुझे मत सिखाओ। हमें जो सही लगेगा हम वही करेंगे। तुम्हें जहां शिकायत करनी है कर लो और अपनी गाड़ी खुद रिपेयर करा लो।”
जब पुलिसकर्मी ने वरिष्ठ अधिकारी का नंबर मांगा, तो नाडर ने कहा कि “मैं ही सर्वेयर हूँ और मैं ही अधिकारी हूँ, जो कहूंगा वही होगा।”
टोल-फ्री पर भी नहीं मिलती सुनवाई
बीमा कराने वाले ग्राहकों का कहना है कि जब कंपनियां पॉलिसी बेचती हैं तो अपने टोल-फ्री नंबर (Toll-Free Number: 1800-258-5956) पर बड़ी-बड़ी बातें करती हैं, लेकिन जब कोई पीड़ित क्लेम या अधिकारी के अड़ियल रवैये की शिकायत करने फोन करता है, तो वहां भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
बड़ा सवाल: जब ₹22,904 का पूरा प्रीमियम चुकाकर Zero Dep policy लेने वाले एक मुंबई पुलिस कर्मचारी के साथ गो डिजिट कंपनी का प्रतिनिधि इस तरह की गुंडागर्दी और अभद्रता कर सकता है, तो आम और असहाय नागरिकों के साथ ये बीमा कंपनियां किस तरह का व्यवहार करती होंगी?
IRDAI और उपभोक्ता अदालत में शिकायत की तैयारी
पीड़ित पुलिसकर्मी अब ‘गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड’ और उनके एग्जीक्यूटिव नाडर के खिलाफ बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI - Insurance Regulatory and Development Authority of India) और कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) में पॉलिसी विवरण और क्लेम नंबर 202601487943 के आधार पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
वशिष्ठ वाणी का रुख: ‘वशिष्ठ वाणी’ आम नागरिकों और ग्राहकों के अधिकारों के हनन के खिलाफ इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा ताकि कॉरपोरेट कंपनियों की इस तानाशाही पर अंकुश लग सके।


















