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मालाड न्यू लिंक रोड पर MG Motor का कब्ज़ा: 2-2 लाइन अवैध पार्किंग से एम्बुलेंस और बेस्ट बसें ठप, गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल

मालाड (संवाददाता): मुंबई (Mumbai) के मालाड न्यू लिंक रोड (Malad New Link Road) स्थित ‘एमजी मोटर शोरूम’ (MG Motor Showroom) के बाहर नियम-कानून और ट्रैफिक व्यवस्था को ठेंगे पर रखकर सरेआम दबंगई चलाई जा रही है। शोरूम प्रबंधन द्वारा मुख्य मार्ग पर खुलेआम एक नहीं, बल्कि दो-दो लाइनों में अवैध पार्किंग (Double Line Parking) की जा रही है।

‘नो पार्किंग’ (No Parking Zone) का बोर्ड लगा होने के बावजूद यह सड़क 24 घंटे एमजी मोटर की निजी पार्किंग बनी रहती है, जिससे आपातकालीन वाहनों सहित आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है।

नए वरिष्ठ अधिकारियों के आने के बाद भी हालात जस के तस

स्थानीय नागरिकों और ‘वशिष्ठ वाणी’ (Vashistha Vani) की टीम द्वारा गोरेगांव ट्रैफिक विभाग (Goregaon Traffic Police Division) के नए वरिष्ठ अधिकारियों से अनगिनत बार शिकायतें की जा चुकी हैं। अधिकारियों की नियुक्ति के बाद जनता को उम्मीद थी कि इस बेहाली से राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत यह है कि जब से नए अधिकारी पदभार पर आए हैं, तब से एक दिन के लिए भी यह सड़क अवैध गाड़ियों से मुक्त नहीं हो सकी है।

एम्बुलेंस फँसे या बसें, किसी को परवाह नहीं

एमजी मोटर शोरूम के बाहर गाड़ियों की इतनी लंबी-लंबी कतारें लगा दी जाती हैं कि व्यस्त समय (Peak Hours) में यहाँ से पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है।

  • आपातकालीन वाहन प्रभावित: मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस (Ambulance) घंटों ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन ठप: बेस्ट (BEST Bus) की यात्री बसें और आम वाहन चालक इस दोहरी अवैध पार्किंग के कारण भारी जाम से जूझ रहे हैं।
  • लापरवाही: इसके बावजूद गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती।

सख्त कार्रवाई से परहेज, क्या है ‘मित्रता’ और ‘लालच’ का खेल?

अब सबसे बड़ा सवाल गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली और नीयत पर उठ रहा है। टोइंग क्रेन (Towing Crane) से गाड़ियों को ज़ब्त करने, भारी चालान (Traffic Fines) काटने या शोरूम प्रबंधन पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाय विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। इलाके में अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी, मित्रता या लालच है जो अधिकारी एमजी मोटर की इस 24 घंटे की गैरकानूनी पार्किंग पर आंखें मूंदे बैठे हैं?

यदि सार्वजनिक रास्ते को यूँ ही निजी शोरूम के हवाले छोड़ा जाता रहा, तो वशिष्ठ वाणी इस प्रशासनिक लापरवाही को और उच्च स्तर (Higher Authorities) तक उजागर करती रहेगी।

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