मुंबई ब्यूरो (वशिष्ठ वाणी): मालाड वेस्ट (Malad West) स्थित न्यू लिंक रोड (New Link Road) और चिंचोली बंदर रोड (Chincholi Bunder Road) पर कानून, नियम और ट्रैफिक व्यवस्था की धज्जियां किस हद तक उड़ाई जा रही हैं, इसका सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण रात के वक्त देखने को मिलता है। ‘वशिष्ठ वाणी’ (Vashistha Vani) द्वारा इससे पहले फ्लैग रेस्टोरेंट (Flag Restaurant) की छत पर प्लास्टिक कवर लगाकर अवैध रूप से गतिविधियां चलाने को लेकर बीएमसी (BMC) से तीखे सवाल पूछे गए थे, लेकिन बीएमसी प्रशासन की तरफ से आज तक इस पर कोई जवाब या एक्शन (Action) नहीं आया है।
अब बीएमसी की इस रहस्यमयी चुप्पी और कथित मिलीभगत का फायदा उठाते हुए न्यू लिंक रोड के इन रसूखदार प्रतिष्ठानों ने अपनी मनमानी को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम द्वारा बीती रात करीब 10:00 बजे की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग (Ground Reporting) में जो भयानक सच्चाई सामने आई है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल कर रख दी है।
रात 10 बजे का ग्राउंड जीरो: बस डिपो तक को नहीं बख्शा!
रात के समय जब आम नागरिकों और यात्रियों को राहत मिलनी चाहिए, तब न्यू लिंक रोड पर इन कमर्शियल दिग्गजों का आतंक और बढ़ जाता है। बीती रात की जमीनी हकीकत ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी:
- सड़क से लेकर बस डिपो तक कब्ज़ा: रात 10 बजे भी न्यू लिंक रोड पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें इस तरह पार्क की गई थीं कि मुख्य मार्ग तो दूर, बस डिपो
(BEST Bus Depot)के आस-पास का पूरा हिस्सा घेर लिया गया था। - आम जनता जाम में त्रस्त: इस बेतहाशा अवैध पार्किंग
(Illegal Parking)के कारण रात के वक्त भी भारी ट्रैफिक जाम(Traffic Jam)की स्थिति बनी रहती है। आम नागरिक और यात्री सड़कों पर जूझने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता।
गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के नए अधिकारियों की तैनाती के बाद खुली छूट!
जब से गोरेगांव ट्रैफिक विभाग (Goregaon Traffic Police Division) में नए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती हुई है, तब से इन रसूखदार शोरूमों और रेस्टोरेंटों के हौसले आसमान छू रहे हैं। हालात यह हैं कि कोई भी गाड़ियां हटाने को तैयार नहीं है:
- मोदी हुंडई शोरूम
(Modi Hyundai Showroom): बार-बार शिकायतों के बावजूद इनकी मनमानी जारी है और सड़क से गाड़ियां हटाने के लिए कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। - एमजी कार शोरूम
(MG Motor Showroom): मुख्य मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर 24 घंटे गाड़ियां खड़ी कराई जा रही हैं, और ट्रैफिक पुलिस आँखें मूँदकर बैठी है। - ग्रीन्स रेस्टोरेंट
(Greens Restaurant): रेस्टोरेंट के बाहर लगातार गाड़ियों का अंबार लगा रहता है, लेकिन ट्रैफिक विभाग को इसमें कोई गैरकानूनी बात नजर नहीं आती। - फ्लैग रेस्टोरेंट
(Flag Restaurant): बीएमसी द्वारा टेरेस पर प्लास्टिक कवर लगाकर रेस्टोरेंट चलाने के अवैध मामले पर अब तक कोई जवाब न देना और दूसरी तरफ ट्रैफिक विभाग द्वारा पूरी छूट देना, यह साफ दर्शाता है कि पर्दे के पीछे किस स्तर का गठजोड़ चल रहा है।
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: क्या प्रशासन की संलिप्तता है?
जब इतने स्पष्ट सबूतों के साथ रात के 10-10 बजे सड़कों और बस डिपो के पास अवैध कब्जा दिखता है, तब भी न तो गोरेगांव ट्रैफिक विभाग का कोई अधिकारी कड़ा कदम उठाता है, और न ही एसीपी (ACP) या उच्च स्तर से कोई सख्त कार्रवाई होती है।
इससे जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि— क्या इन सभी मामलों में बीएमसी और ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों की भी संलिप्तता (Role) है? अगर अधिकारियों की मिलीभगत न होती, तो क्या कोई शोरूम मालिक या रेस्टोरेंट संचालक इस तरह खुलेआम ट्रैफिक नियमों और प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखा सकता था?

वशिष्ठ वाणी का संकल्प: प्रशासन की इस आंख मिचौली और नाकामी को चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक न्यू लिंक रोड और बस डिपो के पास से इन अवैध गाड़ियों का साम्राज्य खत्म नहीं होता और बीएमसी व ट्रैफिक विभाग जवाब नहीं देता, तब तक ‘वशिष्ठ वाणी’ का यह तीखा पहरा पूरी ताकत से जारी रहेगा!









