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16 DAYS – NO ACTION: सांसद महोदय! मालाड की ‘कोयला वाली गली’ में भ्रष्टाचार का धुआं उठ रहा है, क्या आपको अभी भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा?

मुंबई (मालाड): क्या सत्ता की चकाचौंध में जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं से आंखें मूंद लेते हैं? मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में चल रहा अवैध निर्माण आज प्रशासन और राजनीति के गठजोड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की लगातार रिपोर्टिंग के आज 16 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ने अभी भी ‘मौन व्रत’ धारण कर रखा है।

सांसद पीयूष गोयल: जनता की पुकार या वोट की राजनीति?

क्षेत्र की जनता अब सीधे अपने सांसद पीयूष गोयल से सवाल पूछ रही है। जिस सांसद को जनता ने विकास और न्याय के लिए चुना, क्या उनकी जानकारी में यह अवैध निर्माण नहीं है? 16 दिनों का समय किसी भी गंभीर जननेता के लिए कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु काफी होता है, लेकिन यहाँ की खामोशी यह संकेत दे रही है कि शायद “दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।”


कुंदन वळवी और ‘जादुई शक्ति’ का खेल

बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी की कार्यशैली पर अब उंगलियां नहीं, बल्कि पूरा हाथ उठ रहा है।

जब 21 मई 2025 को बीएमसी ने कर्सन (अवैध निर्माणकर्ता) को नोटिस दिया था, तो वह कौन सी ‘अदृश्य शक्ति’ थी जिसने एक साल तक हथौड़े को रोक कर रखा?

क्या बीएमसी के नियमों से ऊपर कोई सिंडिकेट काम कर रहा है जिसे कुंदन वाल्वी का संरक्षण प्राप्त है?


रेलवे ट्रैक के पास ‘खतरे की घंटी’

  • यह अवैध निर्माण केवल एक दीवार नहीं, बल्कि मौत का जाल है। रेलवे ट्रैक के बेहद करीब किया गया यह अतिक्रमण रेलवे सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। यदि यहाँ कोई हादसा होता है, तो प्रशासन की यह 16 दिनों की चुप्पी आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आएगी।

‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल

वशिष्ठ वाणी ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि सिस्टम ने भू-माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं। 16 दिन की यह चुप्पी लोकतंत्र की हार और भ्रष्टाचार की जीत का प्रतीक बनती जा रही है।

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