मुंबई (विशेष प्रतिनिधि):
मुंबई को ‘ग्लोबल सिटी’ बनाने का दावा करने वाली देश की सबसे अमीर महानगर पालिका (BMC) के पास शायद गूगल मैप काम नहीं कर रहा है। मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर 1) स्थित प्रसिद्ध ‘कोयला वाला गली’ का है, जहाँ नियमों, कानूनों और जनसुरक्षा की सरेआम अर्थी निकालते हुए एक आलीशान अवैध निर्माण खड़ा कर दिया गया।

हैरानी और ठहाके लगाने वाली बात तो यह है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ खुद बीएमसी ने आधिकारिक तौर पर तोड़ू कार्रवाई (हथौड़ा चलाने) का नोटिस 21 मई 2025 को ही जारी किया था। आज साल 2026 का जून महीना चल रहा है। यानी बीएमसी के उस ‘वीर नोटिस महाशय’ का पहला जन्मदिन भी धूमधाम से बीत चुका है, लेकिन बीएमसी का हथौड़ा आज तक भद्रन नगर का रास्ता नहीं ढूंढ पाया है!

कमिश्नर साहब, जनता पूछे— ये ‘नोटिस’ था या अवैध निर्माण को मिला ‘सुरक्षा कवच’?
‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे बीएमसी कमिश्नर साहब से पूछती है कि क्या आप भी अपने मातहत काम करने वाले उन लापरवाह अधिकारियों की तरह ही हैं, जिन्हें हर सुबह खबरें तो पढ़नी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सांप सूंघ जाता है?
जब बीएमसी एक झोपड़े या गरीब की दुकान पर बिना नोटिस दिए 2 घंटे में हथौड़ा चला सकती है, तो मालाड वेस्ट की इस ‘कोयला वाला गली’ के रसूखदार अवैध निर्माण पर 1 साल से ज्यादा समय से मेहरबानी क्यों बरस रही है? 21 मई 2025 को जारी हुआ नोटिस आज तक फाइलों की धूल फाँद रहा है। जनता अब यह समझने लगी है कि बीएमसी का नोटिस कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि अवैध निर्माण को ‘कानूनी प्रोटेक्शन’ देने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जारी किया जाता है।
खोखली कथनी और बीएमसी की सुस्त करनी: जनता में जा रहा है गलत संदेश
आज अगर किसी आम नागरिक ने अपने घर की खिड़की भी थोड़ी बाहर निकाल ली होती, तो बीएमसी का दस्ता पूरी फौज के साथ सुबह-सुबह दरवाजे पर खड़ा मिलता। लेकिन जहाँ जनसुरक्षा को ताक पर रखकर पूरी इमारत तान दी गई, वहाँ बीएमसी अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
कमिश्नर साहब, आपकी इस चुप्पी से जनता के बीच यही संदेश जा रहा है कि बीएमसी की ‘कथनी और करनी’ में जमीन-आसमान का फर्क है। क्या न्यूज़ पब्लिश होने के बाद भी आपकी टीम सिर्फ फाइलें पलटेगी या ज़मीन पर उतरकर उस 1 साल पुराने नोटिस की लाज रखेगी?













