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SRA के ‘किंग’ महेंद्र कल्याणकर का अजब खेल: ८६ लाख की वसूली पर ‘मैजिक सन्नाटा’, शिकायतकर्ता को घुमाने में ही बीत गया पूरा साल!

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई के सरकारी दफ्तरों में अगर आपको देखना है कि फाइलें कैसे ‘जिंदा’ रहकर भी ‘लाश’ बन जाती हैं, तो एसआरए (SRA) का दफ्तर जरूर देखें! आज ‘वशिष्ठ वाणी’ आपको मिलवा रही है SRA के सबसे ‘व्यस्त’ अधिकारी—महेंद्र कल्याणकर से। इनकी खासियत यह है कि आप इनसे किसी भी घोटाले पर सवाल पूछने के लिए सौ बार फोन लगाइए, साहब का फोन कभी नहीं उठेगा। लेकिन मजे की बात देखिए—जिस बिल्डर के खिलाफ आप शिकायत कर रहे हैं, साहब उसे तुरंत ‘एलर्ट’ कर देते हैं कि “भाई, खबरदार! कोई आ रहा है।”

स्टैंस बिल्डटेक रियलिटी (Stans Buildtech Realty) और ८६ लाख का ‘गायब’ खजाना

मामला मालवणी गेट नंबर 5 का है। यहां स्टैंस बिल्डटेक रियलिटी के बिल्डर ने बीएमसी का रोड तोड़कर अपनी मर्जी से गटर की पाइप डाल दी। जब सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने ‘वशिष्ठ वाणी’ के जरिए इस गोरखधंधे को उजागर किया, तो प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।


BMC ने १६ जुलाई २०२४ को SRA को आधिकारिक पत्र लिखकर स्पष्ट आदेश दिया कि बिल्डर से ८६,४४,१८८ रुपये (साढ़े ८६ लाख) की वसूली की जाए। लेकिन एसआरए के अधिकारी भोसले साहब ने इस फाइल को ऐसा दबाया कि मानों उस पर सोने की मुहर लगी हो। एक साल तक जब भी सम्राट बागुल ऑफिस जाते, भोसले साहब कभी ‘गायब’ मिलते और जब मिल जाते, तो कहते—”बीएमसी का लेटर ही नहीं मिल रहा है!” हद तो तब हो गई जब बाद में भोसले ने पलटी मारते हुए कहा—”रोड बीएमसी का है, वो खुद वसूलें।”


वशिष्ठ वाणी का व्यंग्यात्मक सवाल: भोसले साहब, अगर रोड बीएमसी का था, तो एक साल तक फाइल दबाकर बैठकर आप कौन सा ‘हल्दी-दूध’ पी रहे थे? क्या आप ये बता सकते हैं कि बिल्डर को बचाने के बदले में आपको कौन सा ‘कमीशन’ मिल रहा है?

महेंद्र कल्याणकर: कार्रवाई करने में ‘आलस’, बचाव में ‘सुपरफास्ट’!

महेंद्र कल्याणकर, आप SRA के सबसे बड़े अधिकारी हैं, लेकिन आपकी चुप्पी यह साबित करती है कि आपकी कुर्सी बिल्डर की सेवा में लगी है। जनता के टैक्स की सैलरी लेकर क्या आप बिल्डरों के ‘अवैध कार्यों’ के लीगल एडवाइजर बन गए हैं? भोसले जैसे अधिकारियों को संरक्षण देकर आप किसे बचा रहे हैं?

सम्राट बागुल ने अब अंतिम चेतावनी दे दी है। अगर जल्द ही ८६ लाख की वसूली नहीं हुई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। साथ ही, उन सभी अधिकारियों—भोसले से लेकर कल्याणकर तक—की संपत्ति और कार्यप्रणाली की जांच की मांग करेंगे, जो इस ‘बिल्डर-अधिकारी सिंडिकेट’ का हिस्सा हैं।

वशिष्ठ वाणी का अल्टीमेटम: अब नहीं तो कब?

मुंबई की जनता अब इस ‘चोर-पुलिस’ के खेल को समझ चुकी है। SRA और BMC की यह ‘कब्रिस्तान’ वाली चुप्पी टूटेगी या फिर कोर्ट के चाबुक से इनका ‘पॉलिश’ किया हुआ चेहरा उतरेगा?

महेंद्र कल्याणकर, याद रखिए, वशिष्ठ वाणी की कलम तब तक नहीं रुकेगी जब तक एक-एक पैसा सरकारी खजाने में जमा नहीं हो जाता। अब या तो आप अपनी कुर्सी की लाज रखिए, या फिर जनता की अदालत में अपनी ‘ईमानदारी’ का सबूत देने के लिए तैयार हो जाइए!

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