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क्या MHADA अधिकारी रोहित शिंदे के संरक्षण में फल-फूल रहा है अवैध निर्माण का ‘साम्राज्य’?

हाराष्ट्र की विकास और आवास व्यवस्था में MHADA (महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की एक प्रतिष्ठित भूमिका रही है, लेकिन हाल की घटनाओं ने इसकी गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विशेष रूप से मालवणी समाना नगर सोसाइटी और ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी में हो रहे अवैध निर्माणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो कानून की धज्जियां उड़ना तय है।

रोहित शिंदे की ‘मेहरबानी’ और गिरती गरिमा

मालवणी क्षेत्र में MHADA अधिकारी रोहित शिंदे की भूमिका संदेह के घेरे में है। जब फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत और सचिव अखिल शेख द्वारा MHADA की जमीन पर कब्जा कर अवैध पार्किंग बनाई जा रही थी, तब तत्काल कार्रवाई करने के बजाय शिंदे केवल नोटिस का खेल खेलते रहे। इसी ढुलमुल रवैये का नतीजा रहा कि फेडरेशन के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने कई अवैध निर्माण खड़े कर दिए।

जब दबाव बढ़ा, तो दिखावे के लिए बुलडोजर चला, लेकिन वह भी केवल एक निर्माण पर! फेडरेशन पर ₹1 लाख 8 हजार का जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। सवाल यह है कि FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? सूत्रों की मानें तो MHADA अधिकारी अंदरखाने गेम खेल रहे हैं और FIR के बजाय फेडरेशन से जुर्माना भरने की ‘मिन्नतें’ कर रहे हैं ताकि कागजी खानापूर्ति की जा सके।


लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ
(वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक)


कानून से ऊपर ‘विधायक निधि’?

रोहित शिंदे की कार्यप्रणाली का सबसे चौंकाने वाला पहलू ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी में देखने को मिला। यहाँ 15 वर्षों से जर्जर पड़े वाटर टैंक के ऊपर अवैध रूप से सीमेंट का ओपन शेड बना दिया गया। जब इस पर सवाल उठे, तो अधिकारी चार महीने तक मौन साधे रहे। बाद में तर्क दिया गया कि चूंकि इसमें विधायक असलम शेख का फंड लगा है, इसलिए इसे छुआ नहीं जा सकता।

हैरानी की बात तो यह है कि जब अधिकारी को ‘ब्लूप्रिंट’ दिखाया गया, तो उन्होंने उसे कचरे के समान मानकर नजरअंदाज कर दिया। क्या अब किसी भी अवैध निर्माण को ‘MLA फंड’ का नाम देकर वैध कर दिया जाएगा? क्या ब्लूप्रिंट और सरकारी नियम अब रद्दी के टुकड़े मात्र रह गए हैं?

जनता की सुरक्षा दांव पर

रोहित शिंदे की इस अनदेखी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है:

  • आपातकालीन रास्ते बंद: अवैध पार्किंग की वजह से इमरजेंसी रास्ते ब्लॉक हैं।
  • फायर ब्रिगेड की समस्या: अगर खुदा-न-खास्ता कोई दुर्घटना होती है, तो संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ी का घुसना नामुमकिन है।
  • खतरनाक बोर्ड: फेडरेशन का भारी-भरकम बोर्ड एक बार गिर चुका है, जिसे फिर से उसी जगह लगा दिया गया है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

यह केवल एक अधिकारी की लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत का मामला प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए।

जब तक रोहित शिंदे जैसे अधिकारी पद पर बने रहेंगे, तब तक मालवणी में अवैध निर्माण का ‘साम्राज्य’ खत्म नहीं होगा। शासन को चाहिए कि:

  1. रोहित शिंदे को तत्काल पद से हटाकर उनकी कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
  2. अवैध निर्माण करने वाले फेडरेशन अध्यक्ष और सचिव पर तुरंत FIR दर्ज की जाए।
  3. राजनीतिक फंड के नाम पर हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर MHADA की गरिमा बहाल की जाए।

महाराष्ट्र की जनता यह देख रही है कि क्या उनकी सरकार ‘संविधान’ के साथ खड़ी है या ‘अवैध कब्जाधारियों’ और उनके ‘मददगार अधिकारियों’ के साथ।

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