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MHADA अधिकारी रोहित शिंदे की ‘विधायक भक्ति’: कानून गया तेल लेने, अब असलम शेख की निधि ही है असली ‘संविधान’!

मुंबई/वशिष्ठ वाणी: क्या MHADA के दफ्तर अब राजनीतिक पार्टियों के एक्सटेंशन काउंटर बन गए हैं? क्या मलाड के अधिकारियों ने कसम खा ली है कि वे जनता के टैक्स से तनख्वाह तो लेंगे, लेकिन काम सिर्फ नेताओं के इशारे पर करेंगे? मलाड वेस्ट के मालवणी से जो खबर आ रही है, वह सीधे तौर पर प्रशासन के गाल पर एक जोरदार तमाचा है।

रोहित शिंदे का ‘निर्लज्ज’ तर्क: अवैध निर्माण को नेता का संरक्षण!

मालवणी की ओम सिद्धिविनायक सोसायटी ने अपनी दबंगई दिखाते हुए 15 साल पुराने वाटर टैंक को सीमेंट की चदरों से ढंक दिया और वहां अवैध गार्डन तान दिया। जब स्थानीय लोगों ने इस ‘खुलेआम लूट’ की शिकायत MHADA अधिकारी रोहित शिंदे से की, तो उनका जवाब किसी भी स्वाभिमानी नागरिक का खून खौलाने के लिए काफी है।

शिंदे ने कार्रवाई से हाथ खड़े करते हुए कथित तौर पर कहा— “इसमें विधायक असलम शेख का फंड लगा है, इसलिए मैं इस पर हाथ नहीं डाल सकता।” शिंदे साहब, जनता आपसे पूछती है:

  1. क्या विधायक का फंड किसी अवैध निर्माण को ‘गंगा जल’ की तरह पवित्र कर देता है?
  2. अगर कोई अपराधी विधायक निधि से अपना घर बना ले, तो क्या आप उसे भी नहीं छुएंगे?
  3. क्या MHADA के नियम केवल उन गरीबों के लिए हैं जिनका कोई राजनीतिक गॉडफादर नहीं है?

नक्शा (Blue Print) गया कूड़ेदान में?

सोसायटी के आधिकारिक ब्लू प्रिंट में उस वाटर टैंक के ऊपर किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं है। गार्डन का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। लेकिन रोहित शिंदे के लिए शायद विधायक की ‘पर्ची’ और ‘फंड’ ही नया कानून बन चुके हैं। यह सरासर भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग है।

लापरवाही का ‘हैट्रिक’ रिकॉर्ड

रोहित शिंदे का नाम अब मलाड में ‘कार्रवाई न करने’ का पर्यायवाची बन चुका है। वशिष्ठ वाणी की फाइलों में शिंदे की लापरवाही के किस्से भरे पड़े हैं:

निष्कर्ष: शिंदे की विदाई या कानून की बहाली?

अगर रोहित शिंदे एक विधायक के फंड के सामने इतने लाचार हैं, तो उन्हें उस कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है। यह मामला अब केवल एक ‘अवैध छत’ का नहीं रह गया है, बल्कि यह उस प्रशासकीय भ्रष्टाचार का है जहां अधिकारी और नेता मिलकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

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