मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मालाड वेस्ट के राजन पाड़ा (राम नगर, चिंचोली बंदर रोड, 1406/15) स्थित प्रतिष्ठित विबग्यॉर राइज स्कूल (VIBGYOR Rise School) के बाहर का नजारा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर सिस्टम में ऊपर से लेकर नीचे तक ‘सेटिंग’ का खेल चल रहा हो, तो कानून और नियमों की कोई औकात नहीं रह जाती। इस स्कूल के पास अपनी खुद की वैध पार्किंग की कोई जगह नहीं है, लेकिन जब गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्थानीय एसीपी (ACP) तक हर कोई इस खेल में शामिल हो, तो फिर मनमानी की कोई हद ही नहीं बचती। आलम यह है कि अब स्कूल की बसें और अन्य वाहन इस पूरे रास्ते को 24 घंटे अपनी निजी पार्किंग बनाकर सड़क पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
शिकायतों से भारी है ‘सेटिंग’ का बाजार: कार्रवाई करे तो कौन?
- पूरा रोड लॉक, फिर भी मजाल है कोई टोके: स्कूल की बसों और वाहनों ने मुख्य सड़क को इस तरह घेर रखा है जैसे यह कोई प्राइवेट डिपो हो। आम नागरिकों और स्कूली बच्चों के अभिभावकों का यहाँ से निकलना दूभर हो गया है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस की आँखें पूरी तरह बंद हैं।
- शिकायतों पर भारी ‘सेटिंग’ का खेल: जनता लगातार शिकायतें करके थक चुकी है, लेकिन जब कागजों पर सुनवाई की बजाय दफ्तरों में ‘सेटिंग’ का सिक्का चलता हो, तो फिर कार्रवाई की उम्मीद करना बेमानी है।
- भ्रष्टाचार का कड़वा सच—ईमानदार कौन बनेगा?: आज प्रशासनिक तंत्र का हाल यह हो गया है कि हर अधिकारी सुधार करने के बजाय इस ‘खेल’ में शामिल होने की होड़ में लगा रहता है। व्यवस्था में यह आम सोच बन चुकी है कि “अगर ईमानदारी की राह पकड़ेंगे, तो गुजारा कैसे चलेगा?” यही वजह है कि नया अधिकारी आते ही सुधार की बजाय अपनी जेब भरने के रास्ते तलाशने लगता है।
देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों की तर्ज पर जब तक ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक गाज नहीं गिरेगी—यानी जब तक जनता की आंखों में धूल झोंकने वाले जिम्मेदार ट्रैफिक अधिकारियों और एसीपी को तुरंत सस्पेंड (Suspend) नहीं किया जाएगा—तब तक इस शहर की व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना बेमानी है। ‘वशिष्ठ वाणी’ इस प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत के हर एक चेहरे को तब तक बेनकाब करता रहेगा, जब तक जनता को इस नरक जैसी स्थिति से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिल जाती।










