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एसीपी और गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की चुप्पी के पीछे कौन सा ‘खेल’ है? माइंडस्पेस में Greens Restaurant के अवैध कब्जे पर सवालों के घेरे में बैठे जिम्मेदार अधिकारी!

मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मालाड वेस्ट के माइंडस्पेस (न्यू लिंक रोड, लिंकवे स्टेट, शॉप नं. 10, 11, 12) स्थित ग्रीन्स रेस्टोरेंट के बाहर का नजारा स्थानीय ट्रैफिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पिछले करीब 7 महीनों से लगातार लिखित शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद यहाँ मुख्य सड़क और आने-जाने के रास्ते से एक दिन भी अवैध कब्जा नहीं हटाया गया है। जब नियम तोड़ने वालों को इस तरह खुली छूट मिल रही हो, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और स्थानीय एसीपी (ACP) कार्यालय की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है?

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? सिस्टम और एसीपी कार्यालय कटघरे में

  • 7 महीने से जस के तस हालात: लगातार सबूत देने और शिकायत करने के बावजूद सड़क पर वाहनों का अवैध कब्जा और अतिक्रमण बरकरार है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जिसके चलते स्थानीय एसीपी और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी इस होटल संचालक पर हाथ डालने से डरते हैं?
  • अधिकारियों की नाकामी या मिलीभगत: जब आम नागरिकों की हर शिकायत को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह साफ जाहिर होता है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूल चुके हैं। क्या अधिकारी सिर्फ फाइलों को दबाने और अपनी तिजोरी भरने के लिए इस कुर्सी पर बैठे हैं?
  • बड़ा सवाल—कार्रवाई कब होगी?: कानून का डंडा सिर्फ आम आदमी पर ही क्यों चलता है? क्या रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आगे पूरा सिस्टम नतमस्तक हो चुका है?

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों की तर्ज पर जब तक ऐसे लापरवाह और निकम्मे अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक गाज नहीं गिरेगी—यानी जब तक जनता की आंखों में धूल झोंकने वाले जिम्मेदार एसीपी और ट्रैफिक अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड (Suspend) नहीं किया जाएगा—तब तक इस शहर की व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना बेमानी है। ‘वशिष्ठ वाणी’ इस प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत के हर एक चेहरे को तब तक बेनकाब करता रहेगा, जब तक जनता को इस समस्या से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिल जाती।

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