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मराठी अस्मिता के नाम पर राजनीति करने वालों, इस मराठी महिला का दर्द क्यों नहीं दिखता?

वशिष्ठ वाणी की लीगल नोटिस से कलेक्टरेट में हड़कंप: डिप्टी कलेक्टर पाडवी को 7 दिनों का अल्टीमेटम, 1 साल से रास्ते में खड़ी अवैध दीवार क्यों नहीं हटी?

मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): मालाड (पश्चिम) के दाणापाणी, एरंगळ विलेज स्थित बुल्लर गार्डन, योगाश्रम में रहने वाली पीड़ित मराठी महिला नेहा निलेश वालावलकर पिछले एक साल से अपने ही घर से बाहर निकलने के बुनियादी हक (राइट टू वे) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। महाराष्ट्र में मराठी मानुष और महिलाओं के हक के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाले राजनेताओं की नाक के नीचे एक महिला को बंधक जैसा जीवन जीने पर मजबूर कर दिया गया है, लेकिन पूरा प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।


वशिष्ठ वाणी के दबाव में ‘रास्ते का खेल’: अगर पाडवी का परिवार होता तो क्या यही करते?

वशिष्ठ वाणी द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाए जाने और दबाव बनाने के बाद, आखिरकार डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी ने मौके पर टीम तो भेजी, लेकिन इंसाफ के नाम पर जो रास्ता दिया गया, वह सिर्फ एक भद्दा मजाक है।

  • मुख्य रास्ते से 1 साल पुरानी अवैध दीवार हटाने की हिम्मत दिखाने के बजाय, अधिकारियों ने पीछे के दरवाजे से एक ऐसा संकरा रास्ता निकाल दिया जहां से घर का जरूरी सामान तक अंदर जाना नामुमकिन है।
  • जनता का सीधा सवाल: डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी जी, अगर इस जगह आपका अपना परिवार रह रहा होता, तो क्या तब भी आप मुख्य रास्ते की अवैध दीवार को छोड़कर पीछे के दरवाजे का ऐसा रास्ता देते? क्या तब तक यह दीवार ढह नहीं चुकी होती?

सूत्रों का बड़ा दावा: कलेक्टरेट का अधिकारी उमेश चौधरी ही है इस अवैध निर्माण का ‘मास्टरमाइंड’?

प्रशासनिक गलियारों और सूत्रों से छनकर आ रही खबरें इस मामले में एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही हैं। चर्चा है कि इस पूरी विवादित जगह और अवैध निर्माण के पीछे कलेक्टर कार्यालय का ही एक अधिकारी उमेश चौधरी असली ‘मास्टरमाइंड’ है। हालांकि वशिष्ठ वाणी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है, लेकिन मौके पर बने हालात इसी सच की गवाही दे रहे हैं।

वरना क्या वजह है कि एक साल से बीच रास्ते में खड़ी अवैध दीवार को हटाने के बजाय, डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी और अधिकारी उमेश चौधरी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले दबंगों के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं? अपराधियों के आगे इस कदर गिड़गिड़ाना साफ दिखाता है कि मलाई कहीं और से मिल रही है। वशिष्ठ वाणी ने पहले ही आशंका जताई थी कि इसमें स्थानीय विधायक (MLA) का हाथ और राजनीतिक दबाव है, जो अब सच साबित होता दिख रहा है।

जब अधिकारी कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय, खुलेआम अवैध कब्जाधारियों और दबंगों का साथ दे रहे हों, तो उनमें वशिष्ठ वाणी के तीखे और सुलगते सवालों का सामना करने की हिम्मत कैसे होगी?

वशिष्ठ वाणी का आर-पार का एक्शन: 7 दिन में कार्रवाई वरना कोर्ट में होगा हिसाब!

वशिष्ठ वाणी सिर्फ खबरें नहीं छापता, बल्कि पीड़ित को निस्वार्थ न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक लड़ता है। इस तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लीगल टीम ने डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी को आधिकारिक लीगल नोटिस भेजकर सभी गंभीर सवालों के जवाब मांगे हैं।

साफ चेतावनी: अगर अगले 7 दिनों के भीतर इस अवैध दीवार को हटाकर पीड़ित महिला नेहा निलेश वालावलकर को उनका मुख्य रास्ता नहीं दिया गया, तो डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी को कोर्ट के कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा। कलेक्ट्रेट की इस तानाशाही का हिसाब अब सीधे अदालत में होगा।

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