कांदिवली, मुंबई: खबरें छप गईं, जनता ने आवाज़ उठा ली, लेकिन कांदिवली के अधिकारियों का जमीर अभी भी सो रहा है! छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर भारत गैस एजेंसी की गुंडागर्दी और अवैध ‘सड़क डिपो’ पर ‘वशिष्ठ वाणी’ और प्रमुख मीडिया माध्यमों द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि आखिर कांदिवली ट्रैफिक विभाग, बीएमसी और पुलिस प्रशासन इतने बेफिक्र और लाचार कैसे हो सकते हैं?
आधी रात 12 से 2 बजे के बीच आइए, दिख जाएगा ‘मौत का गोदाम’
मीडिया में लगातार मुद्दा उठने के बावजूद गैस सिलेंडरों से भरे वाहन टस से मस नहीं हुए हैं।
- ज़मीनी हकीकत: रात के 12 बजे से 2 बजे के बीच अगर कोई भी वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस कमिश्नर या जॉइंट सीपी (ट्रैफिक) बिना बताए यहाँ का दौरा करे, तो उन्हें सड़क किनारे दर्जनों एलपीजी सिलेंडरों से लदे वाहन लावारिस खड़े मिलेंगे।
- खुली चुनौती: यह दृश्य साफ बयान करता है कि गैस एजेंसी मालिकों को कानून, पुलिस या बीएमसी का कोई खौफ नहीं रह गया है।
‘जब मीडिया चिल्ला रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?’
जब एक ज़िम्मेदार मीडिया संस्थान लगातार सबूतों के साथ जनता की सुरक्षा का मुद्दा उठा रहा है, तब भी ज़ीरो-एक्शन मॉडल का चलना क्या साबित करता है?
कड़वा सवाल: क्या कांदिवली ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी के अधिकारियों की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी है कि उन्हें जनता की जान की कोई परवाह नहीं? मीडिया के चिल्लाने के बाद भी अगर गाड़ियां नहीं हटाई जा रही हैं, तो क्या यह माना जाए कि हफ्ता/मलाई का रेट इतना बढ़ा दिया गया है कि अधिकारियों ने अपनी आँखें और कान पूरी तरह बंद कर लिए हैं?
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
मामले में स्थानीय कांदिवली ट्रैफिक विभाग, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई (Enforcement Action) देखने को नहीं मिल रही है।
कानूनी और नीतिगत पहलू:
- क्या संबंधित एजेंसी के पास सार्वजनिक मार्ग पर वाहनों को पार्क करने की वैध अनुमति है?
- यदि नहीं, तो स्थानीय यातायात पुलिस एवं निकाय अधिकारियों द्वारा मोटर वाहन अधिनियम और बीएमसी अधिनियम के तहत अब तक क्या औपचारिक कार्रवाई (जैसे चालान, जब्ती या कारण बताओ नोटिस) की गई है?
उच्च अधिकारियों से संज्ञान लेने की मांग
स्थानीय नागरिकों एवं जन-प्रतिनिधियों ने मुंबई पुलिस आयुक्त और संयुक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) से इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। नागरिकों की मांग है कि रिहायशी परिसर के बाहर से इन वाहनों की अवैध पार्किंग को स्थायी रूप से हटाकर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
(संपादकीय टिप्पणी: ‘वशिष्ठ वाणी’ जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर निष्पक्षता बनाए रखते हुए संबंधित गैस एजेंसी एवं जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का भी स्वागत करता है।)












