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वशिष्ठ वाणी के तीखे सवाल: फुटपाथ पर ‘धर्म के व्यापारियों’ का कब्ज़ा, BMC अधिकारी बताएं कि अब जनता कहाँ से जाएगी?

मुंबई: क्या मुंबई महानगरपालिका (BMC) के लिए अब न्यायपालिका के आदेशों का कोई मोल नहीं बचा है? यह सवाल आज इसलिए उठ रहा है क्योंकि मालाड-कांदिवली में ‘धर्म के व्यापारियों’ ने न केवल फुटपाथ पर कब्जा किया है, बल्कि सड़क को भी पार्किंग स्थल बना दिया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी BMC की चुप्पी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख—BMC को क्या भूलने की बीमारी है?

मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट कहा है:

“फुटपाथ नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इसे किसी भी स्थिति में निजी इस्तेमाल, व्यापार या पार्किंग के लिए नहीं छीना जा सकता। फुटपाथों को अतिक्रमण-मुक्त रखना स्थानीय निकाय (BMC) की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

बावजूद इसके, BMC के अधिकारी इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ का स्पष्ट आरोप है कि बिना किसी मिलीभगत के इतनी बड़ी हिम्मत कोई अतिक्रमणकारी नहीं जुटा सकता।

वशिष्ठ वाणी के तीखे सवाल

BMC प्रशासन से हमारा सीधा और कड़वा सवाल है:

  1. कानूनी नोटिस का मज़ाक: क्या अब BMC को कानूनी नोटिस और अदालती आदेशों का भी डर नहीं रहा?
  2. कैसी है यह ‘मलाई’?: क्या इन अतिक्रमणकारियों ने अधिकारियों को इतनी मोटी ‘मलाई’ खिला दी है कि अब आपको जनता की जान की भी कोई परवाह नहीं है?
  3. जनता जाए तो कहाँ जाए?: फुटपाथ पर ‘मंडप’ और सड़क पर ‘अवैध पार्किंग’—BMC अधिकारियों की इस असंवेदनशीलता के कारण अगर कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

सावधान अधिकारी, अब जवाब सीधा कोर्ट में!

‘वशिष्ठ वाणी’ अब इस मामले को हल्के में नहीं लेगी। हमने BMC को कानूनी नोटिस भेजा है और अब हम सीधे माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। हम यह साबित करेंगे कि कैसे आपकी मिलीभगत से जनता के चलने का हक छीना गया है।

या तो आप तत्काल प्रभाव से इन अतिक्रमणों को हटाएँ और फुटपाथ जनता को सौंपें, या फिर यह स्वीकार करें कि आप भी इस अतिक्रमण के ‘पार्टनर’ हैं। जनता सब देख रही है, और अब जवाब देने का समय आ गया है!

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