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सड़क या बारूद का ढेर? कांदिवली में रिहायशी कॉम्प्लेक्स के बाहर भारत गैस का अवैध ‘गोदाम’

विशेष संवाददाता, कांदिवली

मुंबई। कांदिवली पूर्व स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर की मुख्य सड़क इन दिनों आम जनता के चलने के लिए कम और भारत गैस एजेंसी के अवैध डिपो के रूप में ज्यादा इस्तेमाल हो रही है। गैस सिलेंडरों से लदे कई वाणिज्यिक वाहन 24 घंटे सड़क के किनारे अवैध रूप से पार्क रहते हैं। घनी आबादी वाले इस रिहायशी इलाके में सिलेंडरों से भरे वाहनों का बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के दिन-रात खड़े रहना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें करने के बावजूद न तो कांदिवली ट्रैफिक विभाग हरकत में आ रहा है और न ही बीएमसी अथवा स्थानीय पुलिस कोई ठोस कार्रवाई कर रही है।

छोटी-सी चिंगारी और सैकड़ों जिंदगियां खतरे में

स्थानीय नागरिकों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर है। गैस सिलेंडर ज्वलनशील और बेहद संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। नियमों के मुताबिक, ऐसे वाहनों की पार्किंग के लिए निर्धारित और सुरक्षित स्थान होना अनिवार्य है।

बड़ा सवाल: यदि किसी असामाजिक तत्व, बीड़ी-सिगरेट की चिंगारी या किसी तकनीकी खराबी के कारण इनमें से किसी वाहन में आग लग जाती है, तो छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स और आसपास के दर्जनों परिवारों की सुरक्षा का क्या होगा? क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग किसी बड़े अग्निकांड और जान-माल के नुकसान का इंतजार कर रहे हैं?

प्रशासनिक नाकामी: क्या सांठगांठ का चल रहा है खेल?

सार्वजनिक सड़क को अवैध गोदाम बनाकर कब्जा जमाना बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं दिखता। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार इस मुद्दे को उजागर किए जाने के बाद भी संबंधित विभागों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी: कांदिवली ट्रैफिक विभाग की पेट्रोलिंग गाड़ियां रोजाना इस मार्ग से गुजरती हैं, फिर भी सड़क को गोदाम बनाने वाले वाहनों पर कोई नो-पार्किंग या जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं होती?
  • बीएमसी और पुलिस का मौन: सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण और जनसुरक्षा के खिलवाड़ पर बीएमसी का अतिक्रमण विरोधी दस्ता और स्थानीय पुलिस बल चुप्पी क्यों साधे हुए है?

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि क्या पैसों की ‘मलाई’ और प्रशासनिक साठगांठ इतनी मजबूत है कि आम जनता की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है?

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

कांदिवली ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी की लगातार अनदेखी से तंग आकर अब क्षेत्र के लोगों का भरोसा निचले स्तर के अधिकारियों से उठ चुका है। निवासियों ने मांग की है कि मुंबई पुलिस आयुक्त और संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) इस मामले का खुद संज्ञान लें।

नागरिकों का कहना है कि जब तक कोई वरिष्ठ अधिकारी हस्तक्षेप कर इस अवैध पार्किंग को स्थाई रूप से नहीं हटवाएगा और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक आम जनता खुद को असुरक्षित ही महसूस करेगी।

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