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वशिष्ठ वाणी विशेष: मुंबई RTO की नाक के नीचे ऑटो चालकों का ‘अपना राज’, नियम बेअसर!

मालाड-गोरेगांव की सड़कों पर जनता बेहाल, प्रशासन मौन

मुंबई: जब रक्षक ही भक्षक बन जाए या अपनी आँखें मूंद ले, तो जनता का भगवान ही मालिक है। मुंबई के मालाड और गोरेगांव में इन दिनों यही स्थिति देखने को मिल रही है। वशिष्ठ वाणी आज दिनांक 17 अप्रैल 2026 को उन ठोस प्रमाणों को सार्वजनिक कर रहा है, जो मुंबई RTO और ट्रैफिक पुलिस की कार्यक्षमता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं।

मॉल नहीं, ये ‘अवैध अड्डों’ में तब्दील हो चुके हैं

मालाड का इन्फिनिटी मॉल, इनऑर्बिट, डी-मार्ट और गोरेगांव का ओबेरॉय मॉल—ये स्थान अब शॉपिंग के लिए कम और ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी के लिए ज्यादा जाने जाते हैं।

वशिष्ठ वाणी की पड़ताल में सामने आए कड़वे सच:

  1. ‘लॉन्ग डिस्टेंस’ का लालच: कतार में खड़े चालक छोटे भाड़े (Short Distance) के लिए यात्रियों को दुत्कार देते हैं। कानूनन कोई भी चालक भाड़े से इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यहाँ कानून की धज्जियां खुलेआम उड़ रही हैं।
  2. सड़क पर ‘कब्जा’: इन मॉल्स के बाहर की मुख्य सड़कें पार्किंग लॉट में तब्दील हो गई हैं। इससे ‘पीक आवर्स’ में एम्बुलेंस तक को निकलने का रास्ता नहीं मिलता।
  3. RTO की ‘सुविधाजनक’ चुप्पी: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि RTO अधिकारी रोजाना यहाँ से गुजरते हैं। क्या उन्हें यह कतारें नहीं दिखतीं? या फिर ‘दिखावे की कार्रवाई’ के पीछे कोई और सांठगांठ है?

प्रशासन से वशिष्ठ वाणी के तीखे सवाल:

  • धारा 178 (3) (MVA 1988) के तहत सवारी से मना करना दंडनीय अपराध है, तो इन चालकों के लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किए जाते?
  • शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई क्यों? क्या RTO का काम केवल ‘ऑफिस’ में बैठकर शिकायत का इंतजार करना है या जमीनी स्तर पर अनुशासन बनाए रखना?
  • इन प्रमुख पॉइंट्स पर CCTV मॉनिटरिंग और परमानेंट बीट चौकी क्यों नहीं बनाई जाती?

ग्राउंड रिपोर्ट: “आज की प्रकाशित तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे आम आदमी इन मॉल के बाहर खड़ा होकर गिड़गिड़ाने पर मजबूर है, जबकि वर्दीधारी अधिकारी पास से गुजरते हुए भी अनजान बने रहते हैं। यह केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम के भ्रष्टाचार की बू है।”


निष्कर्ष और मांग

वशिष्ठ वाणी प्रशासन से मांग करता है कि केवल ‘जुर्माना’ भरकर इन्हें न छोड़ा जाए। जब तक इन क्षेत्रों को ‘नो-रिफ्यूजल जोन’ घोषित कर परमिट रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी, यह समस्या खत्म नहीं होगी।

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