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‘सतीश राउत’ की मेहरबानी: एकता नगर सिग्नल बना ऑटो-रिक्शा का ‘गैरेज’, क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?

कांदिवली: कांदिवली का एकता नगर सिग्नल अब यातायात का सुगम मार्ग नहीं, बल्कि सतीश राउत की सरपरस्ती में ‘ऑटो-रिक्शा गैरेज’ में तब्दील हो चुका है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए मुसीबत बन चुके इस अवैध गैरेज पर न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की सख्ती।

कार्रवाई का दिखावा या जनता को गुमराह करने की साजिश?

जब भी अवैध पार्किंग की शिकायतें उठती हैं, तो सतीश राउत द्वारा ‘कार्रवाई’ का राग अलापा जाता है। लेकिन ज़मीनी हकीकत क्या है? कार्रवाई के बाद भी एक भी वाहन वहां से नहीं हटता। एकता नगर सिग्नल पर अवैध रूप से खड़े रिक्शे और खुलेआम चल रहे गैरेज के काम इस बात का सबूत हैं कि सतीश राउत के दावे केवल जनता और मीडिया को गुमराह करने का एक तरीका हैं।

‘सतीश राउत’ युग: कांदिवली की बदहाली का दौर

जब से सतीश राउत ने कांदिवली ट्रैफिक विभाग का जिम्मा संभाला है, तब से स्थिति सुधारने के बजाय और अधिक बिगड़ गई है। मालवणी से लेकर कांदिवली तक की सड़कों को अवैध पार्किंग ने ‘खंडहर’ बना दिया है। सवाल यह है कि सतीश राउत आखिर किसे बचा रहे हैं? क्या जनता की सुरक्षा उनके लिए कोई मायने नहीं रखती, या ‘मलाई’ का खेल उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है?

वशिष्ठ वाणी की दो टूक मांग

सतीश राउत को समझना होगा कि कांदिवली की जनता अब जागरूक हो चुकी है। आपकी ‘झूठी कार्रवाई’ और प्रशासनिक चुप्पी की उम्र बहुत छोटी है।

  • वशिष्ठ वाणी की चेतावनी: अगर एकता नगर सिग्नल से ये अवैध गैरेज और रिक्शे तुरंत नहीं हटाए गए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरेगा।
  • प्रशासनिक जवाबदेही: हम मांग करते हैं कि सतीश राउत की इस कार्यप्रणाली की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच हो और उनकी विफलता पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

सतीश राउत, यदि आपसे कांदिवली का ट्रैफिक नहीं संभल रहा, तो कुर्सी छोड़ दें। जनता को ऐसे अधिकारी की जरूरत नहीं जो अपनी जेब भरने के लिए आम आदमी की जान जोखिम में डाले।

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