मुंबई/ विशेष रिपोर्ट: मुंबई में मानसून की पहली भारी बारिश ने ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के जल निकासी के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। मालाड (पश्चिम) के वार्ड क्रमांक 33 स्थित कई इलाकों में जलभराव के बाद स्थानीय नागरिकों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिन पंपों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर जल निकासी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वही पंप बारिश के वक्त बंद पड़े थे।
जमीनी हकीकत: न पंप चालू, न कोई ऑपरेटर मौजूद
22 जुलाई को हुई भारी बारिश के बाद वार्ड 33 के राठोडी विलेज, ओमजी कंपाउंड, खारोडी, आज़मी नगर और गावदेवी मंदिर परिसर में घुटनों तक पानी भर गया। जब स्थानीय समाजसेवक सम्राट बागुल ने घटनास्थल का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया, तो बीएमसी की बड़ी लापरवाही उजागर हुई:
- जल निकासी के लिए लगाया गया पंप पूरी तरह बंद पड़ा था।
- मौके पर पंप चलाने के लिए न तो कोई ठेकेदार का कर्मचारी था और न ही कोई ऑपरेटर मौजूद था।
- नाले के गंदे पानी के बीच से वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और स्कूली बच्चे गुजरने को मजबूर दिखे।
बीएमसी कमिश्नर और वार्ड ऑफिसर से लिखित शिकायत, सख्त कार्रवाई की माँग
मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजसेवक सम्राट बागुल ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त, पी/पश्चिम वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी और सहायक अभियंता (परिरक्षण) को आधिकारिक लिखित शिकायत सौंपी है।
अपनी शिकायत में उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- भुगतान पर रोक: लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- विभागीय कार्रवाई: संबंधित ठेकेदार, कनिष्ठ अभियंता (JE) और जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
- 24×7 संचालन: बारिश के दौरान सभी जल निकासी पंपों का निरंतर चालू रहना सुनिश्चित किया जाए।
- आरटीआई (RTI) से खुलासा: सम्राट बागुल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पंप व्यवस्था से संबंधित निविदा (Tender), करारनामा और ठेकेदार को किए गए भुगतान का सच बाहर लाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI, 2005) के तहत आवेदन दायर किया जा रहा है।
‘अमीर इलाकों को तुरंत राहत, झुग्गी बस्तियों से सौतेला व्यवहार’
स्थानीय नागरिकों में बीएमसी की इस दोहरी नीति को लेकर भारी आक्रोश है। नागरिकों का आरोप है कि बीएमसी प्रशासन पॉश (उच्चभ्रू) इलाकों में तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करता है, जबकि झुग्गी-झोपड़ी और आम बस्तियों की लगातार अनदेखी की जाती है। बंद पड़े पंपों के फोटो और लोकेशन सहित सभी साक्ष्य बीएमसी अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं।
बड़ा सवाल: पी/पश्चिम वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी को इस घोर लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना होगा। क्या टैक्स भरने वाली आम जनता यूं ही हर बारिश में नाले के पानी में डूबने को मजबूर रहेगी, या जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर गाज गिरेगी?










