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श्रीनगर सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का लोकसभा में ऐतिहासिक भाषण वायरल

‘वंदे मातरम’ पर संवैधानिक और धार्मिक दृष्टिकोण बेबाकी से रखा

नई दिल्ली | लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का भाषण सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। तर्कपूर्ण और गंभीर लहजे में दिए गए इस संबोधन ने धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकार और देशभक्ति के बीच के संबंध पर नया विमर्श खड़ा कर दिया है।

‘देशप्रेम पर सवाल उठाने की आदत बंद होनी चाहिए’ — आगा रुहुल्लाह

अपने भाषण में सांसद मेहदी ने कहा कि भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज इस देश की आजादी और उसके निर्माण में अग्रणी योगदान देने वालों में रहा है।

उन्होंने कहा—

“मैं मां भारती को सिर-आंखों पर रखता हूं, लेकिन अल्लाह के सिवा किसी और को सजदा करना मेरे लिए संभव नहीं। ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियां मेरे धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत हैं, इसलिए उन्हें पढ़ना मेरा संवैधानिक अधिकार है या नहीं — इसका निर्णय कोई मुझसे नहीं छीन सकता।”

मेहदी ने आगे कहा—

“देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटना बंद करें। भारतीय मुसलमानों ने आजादी की लड़ाई में सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं।”

“असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है”

उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आत्महत्या, प्रदूषण और आर्थिक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें पीछे छोड़कर धार्मिक नारेबाजी को बार-बार आगे लाया जा रहा है।

“वंदे मातरम और भारत माता की जय जैसे मुद्दों को बार-बार उछालकर असली समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।”


सोशल मीडिया पर ऐतिहासिक भाषण वायरल

आगा रुहुल्लाह मेहदी के आधिकारिक हैंडल @Office_ASRM पर पोस्ट किए गए 4 मिनट 42 सेकंड के वीडियो को
अब तक 1.20 लाख से अधिक व्यू, 10 हजार से अधिक लाइक्स और 4 हजार रीपोस्ट मिल चुके हैं।

वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
कई यूजर्स ने इसे—

  • “संविधान की मजबूत आवाज”
  • “धर्मनिरपेक्षता की मिसाल”
  • “मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का साहसी प्रतिनिधित्व”
    बताया है।

वहीं कुछ यूजर्स ने भाषण की आलोचना करते हुए इसे “चुनिंदा देशभक्ति” और “राजनीतिक तुष्टिकरण” करार दिया।


राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ट्वीट कर कहा—

“रुहुल्लाह मेहदी ने न केवल कश्मीर की अवाम, बल्कि देश के मुसलमानों की आवाज़ बुलंद की।”

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—

“यह भाषण आने वाले समय का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।”

भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हालांकि सदन के अंदर कुछ भाजपा सांसदों ने भाषण के दौरान आपत्ति दर्ज करानी चाही, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें शांत रहने का निर्देश दिया।


#RuhullahSpeaks और #VandeMataramDebate ट्रेंड में

सोमवार देर रात से ट्विटर (X) पर #RuhullahSpeaks और #VandeMataramDebate लगातार ट्रेंड कर रहे हैं, जिससे साफ है कि यह मुद्दा सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।


यह भाषण न केवल धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक सीमाओं को समझने की दिशा में नई बहस को जन्म देता है, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में देशभक्ति और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत को भी रेखांकित करता है।

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