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विशेष कटाक्ष: मालाड में ‘कर्सन’ राज— जहाँ पीयूष गोयल का रसूख और BMC का कानून ‘कोयला वाली गली’ में दफन हो गया!

मुंबई, मालाड (पश्चिम): मुंबई के मालाड में इन दिनों एक अद्भुत ‘चमत्कार’ देखने को मिल रहा है। यहाँ देश के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शुमार सांसद पीयूष गोयल का प्रभाव, नगरसेवक योगेश वर्मा की सक्रियता और बीएमसी (BMC) का कानून… सब एक कथित भू-माफिया ‘कर्सन’ की चौखट पर जाकर दम तोड़ देते हैं।

भदरण नगर, रोड नंबर 1, रेलवे ट्रैक के पास स्थित ‘कोयला वाली गली’ आज भ्रष्टाचार की नई प्रयोगशाला बन चुकी है, जहाँ अवैध निर्माण की ईंटें किसी विकास योजना से नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत के ‘सीमेंट’ से जुड़ रही हैं।


कुंदन वाल्वी का ‘मौन व्रत’ या माफिया को ‘कवच’?

बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी की कार्यशैली पर अब कटाक्ष नहीं, बल्कि सवालिया निशान लग रहे हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा बार-बार सबूत परोसने के बाद भी वाल्वी साहब की नींद न टूटना यह दर्शाता है कि या तो उनके कानों तक जनता की चीखें पहुँच नहीं रहीं, या फिर माफिया ‘कर्सन’ ने उनके चश्मे पर ‘अंधेपन’ की पट्टी बांध दी है। आखिर क्या मजबूरी है कि कमिश्नर अश्विनी भिड़े के निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर एक अधिकारी माफिया का ‘निजी बॉडीगार्ड’ बना बैठा है?


सत्ता के ‘शूरवीरों’ की रहस्यमयी चुप्पी

मालाड की जनता पूछ रही है कि चुनाव के समय शेर की तरह दहाड़ने वाले भाजपाई सूरमा आज ‘कर्सन’ के सामने भीगी बिल्ली क्यों बने हुए हैं?

  • पीयूष गोयल जी: क्या आपके ‘विकसित भारत’ के सपने में माफियाओं द्वारा रेलवे ट्रैक के पास अवैध कब्जा करना भी शामिल है?
  • योगेश वर्मा जी: वॉर्ड 35 की जनता ने आपको नगरसेवक बनाया था, माफिया का ‘मूकदर्शक’ बनने के लिए नहीं। आपकी चुप्पी कहीं ‘सहमति’ तो नहीं?
  • ऋतु तावड़े जी: मेयर पद की गरिमा और अनुभव क्या सिर्फ फाइलों तक सीमित है? धरातल पर माफिया आपकी नाक के नीचे सिस्टम को ठेंगा दिखा रहा है।

‘वशिष्ठ वाणी’ का वार: कब तक बचोगे?

सिस्टम में बैठे इन ‘जिम्मेदार’ लोगों को शायद लगता है कि खबरें छपने से कुछ नहीं होता। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि ‘वशिष्ठ वाणी’ ने जो आईना दिखाया है, उसमें उनके भ्रष्टाचार के दाग साफ दिख रहे हैं। न्यूज़ पब्लिश होने के बाद भी असर न पड़ना यह साबित करता है कि मालाड का प्रशासन अब ‘राम भरोसे’ नहीं, बल्कि ‘माफिया भरोसे’ चल रहा है।

अंतिम चेतावनी:

अगर रेलवे ट्रैक के पास इस अवैध निर्माण पर जल्द ही पीयूष गोयल का ‘संकल्प’ और बीएमसी का ‘हथौड़ा’ नहीं चला, तो जनता यह मान लेगी कि मालाड के इन सफेदपोशों ने ‘कर्सन’ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

क्या बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े इस ‘भ्रष्टाचार की गंगा’ में डुबकी लगा रहे अपने अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगी या मालाड की जनता को माफियाओं का गुलाम बना रहने देंगी?


ब्यूरो रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी (सिस्टम को जगाने की एक कोशिश)

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