Piyush Goyal vs Malad Land Mafia: 22 दिन बाद भी स्कोर 0-1, माफिया भारी?
मुंबई (मालाड): लोकशाही में ‘चुप्पी’ के कई अर्थ होते हैं, लेकिन मालाड वार्ड 35 की कोयला वाली गली में सांसद पीयूष गोयल की चुप्पी का अर्थ अब जनता को डराने लगा है। 22 दिन—जी हाँ, पूरे तीन हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा उजागर किए गए इस काले साम्राज्य पर प्रशासन का एक कागज़ तक नहीं हिला।
सांसद जी, ‘कोयला’ काला है या दाल में कुछ काला है?
एक समय था जब आप रेलवे की पटरियों की सुरक्षा के लिए कड़े फैसले लेते थे, लेकिन आज आपकी ही नाक के नीचे, रेलवे ट्रैक के ठीक बगल में एक ‘अवैध किला’ खड़ा हो गया है।
- क्या 22 दिन का समय एक ट्वीट करने या एक आदेश देने के लिए काफी नहीं था?
- क्या कर्सन जैसे भू-माफियाओं का कद उत्तर मुंबई की जनता की सुरक्षा से बड़ा हो गया है?
बीएमसी का ‘सेटिंग’ वाला चश्मा

पी/उत्तर वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के पास शायद वह चश्मा है, जिससे केवल आम आदमी का छोटा सा छज्जा तो दिखता है, लेकिन माफिया की बहुमंजिला अवैध इमारतें ‘अदृश्य’ हो जाती हैं। 21 मई 2025 को जारी किया गया नोटिस आज प्रशासन की फाइलों में दम तोड़ रहा है।

“जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो रखवाले से सवाल पूछना गुनाह नहीं, बल्कि धर्म बन जाता है। पीयूष गोयल जी, मालाड आपसे जवाब चाहता है!”
सुरक्षा के साथ खिलवाड़: अगला बड़ा हादसा किसका इंतज़ार?
यह सिर्फ एक अवैध निर्माण नहीं है, यह रेलवे की सुरक्षा के लिए एक ‘टाइम बम’ है। पटरियों के इतने करीब निर्माण करना न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि जानलेवा भी है। क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी?
वशिष्ठ वाणी की दहाड़: हम झुकेंगे नहीं!
सांसद और बीएमसी के अधिकारी शायद यह सोच रहे हैं कि समय बीतने के साथ मीडिया शांत हो जाएगा। लेकिन ‘वशिष्ठ वाणी’ ने यह बीड़ा उठाया है कि जब तक इस अवैध निर्माण पर सरकारी हथौड़ा नहीं चलेगा, हमारी कलम की स्याही सूखेगी नहीं।














