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खुलासा: मालाड में भू-माफिया कर्सन के आगे ‘नतमस्तक’ बीएमसी प्रशासन; क्या अधिकारी कुंदन वळवी की आँखों पर बंध गई है ‘रिश्वत’ की पट्टी?

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई के मालाड वेस्ट में कानून और व्यवस्था का मखौल उड़ाया जा रहा है। भाद्रन नगर रोड नंबर 1, कोल्सा वाला गली में रेलवे ट्रैक के निकट हुआ अवैध निर्माण आज भी सीना ताने खड़ा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार सबूतों के साथ खबर प्रकाशित करने के बावजूद, बीएमसी के संबंधित अधिकारी कुंदन वळवी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

आम नागरिक के लिए हथौड़ा, माफिया के लिए ‘मौन’?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही निर्माण किसी साधारण नागरिक ने किया होता, तो बीएमसी का दस्ता अब तक उसे मलबे में तब्दील कर चुका होता। लेकिन यहाँ मामला भू-माफिया कर्सन का है, जिसके रसूख और आर्थिक प्रभाव के आगे पूरा तंत्र लाचार नजर आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर कुंदन वळवी इस अवैध निर्माण को संरक्षण क्यों दे रहे हैं? क्या अधिकारियों और माफियाओं के बीच कोई ‘गुप्त समझौता’ हो चुका है?


बीएमसी के लेटर की उड़ी धज्जियां

  • बीएमसी द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि अवैध निर्माण का कार्य तुरंत नहीं रोका गया, तो प्रशासन उसे ध्वस्त (Demolition) कर देगा। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि भू-माफिया कर्सन ने बीएमसी के इस आदेश को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है। मौके पर निर्माण कार्य न केवल जारी है, बल्कि और भी तेजी से किया जा रहा है।

अधिकारी कुंदन वळवी की ‘दोहरी चाल’?

अब सवाल यह उठता है कि जब बीएमसी ने खुद स्वीकार किया है कि निर्माण अवैध है और लेटर जारी किया है, तो फिर अधिकारी कुंदन वळवी का दस्ता हथौड़ा लेकर मौके पर क्यों नहीं पहुंचा? क्या यह लेटर सिर्फ जनता की आँखों में धूल झोंकने के लिए जारी किया गया था? सूत्रों का कहना है कि माफिया कर्सन के रसूख के आगे अधिकारी कुंदन वळवी इतने लाचार हो गए हैं कि वे अपना ही आदेश लागू करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

सुरक्षा के साथ खिलवाड़, अधिकारी बेफिक्र

रेलवे ट्रैक के पास इस तरह का निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी एक बड़ा खतरा है। बीएमसी को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कुंदन वळवी की फाइलों में यह मामला शायद कहीं ‘दबा’ दिया गया है। जनता अब खुलेआम यह मांग कर रही है कि जब तक कुंदन वळवी जैसे अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक निष्पक्ष कार्यवाही संभव नहीं है।

वशिष्ठ वाणी की सीधी मांग:

  1. कमिश्नर स्तर की जांच: भू-माफिया कर्सन और अधिकारी कुंदन वळवी के बीच के संबंधों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  2. तत्काल निष्कासन: कर्तव्य में लापरवाही बरतने और माफिया को लाभ पहुँचाने के आरोप में कुंदन वळवी को उनके पद से हटाया जाए।
  3. ध्वस्तीकरण की कार्यवाही: रेलवे सुरक्षा क्षेत्र में हुए इस अवैध निर्माण को 48 घंटे के भीतर जमींदोज किया जाए।

निष्कर्ष: ‘वशिष्ठ वाणी’ इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज दबने नहीं देगी। अगर प्रशासन ने जल्द ही कुंदन वळवी पर एक्शन नहीं लिया और अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया, तो हम इस लड़ाई को माननीय न्यायालय तक ले जाएंगे।

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