• यह सिस्टम फेलियर है या सत्ता-संरक्षण का खुला खेल?
मुम्बई/वशिष्ठ वाणी। मालवणी स्थित स्वप्नपूर्ति सोसायटी में पिछले कई वर्षों से जो कुछ चल रहा है, वह न केवल सहकारी कानूनों की खुलेआम अवहेलना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि संरक्षण सही हाथों में हो, तो नियम-कानून केवल काग़ज़ों तक सीमित रह जाते हैं।
इस पूरे प्रकरण के केंद्र में हैं म्हाडा उपनिबंधक कार्यालय के अधिकारी बी. एस. कटरे, जिनकी मेहरबानी से सोसायटी अध्यक्ष की मनमानी अब चरम पर पहुँच चुकी है।
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15 वर्षों से पद पर जमे अध्यक्ष और ‘अभयदान’ देता सिस्टम
सामना नगर, मालवणी गेट नंबर 8 स्थित स्वप्नपूर्ति सोसायटी के अध्यक्ष—जो पेशे से ऑटो रिक्शा चालक बताए जाते हैं—पिछले 15 वर्षों से पद पर काबिज़ हैं। नियमों के अनुसार यह अपने-आप में गंभीर प्रश्न है, लेकिन जब भी किसी सदस्य या रूम मालिक ने म्हाडा में शिकायत की, तो वहाँ उपनिबंधक बी. एस. कटरे ढाल बनकर खड़े दिखे।
ऐसा प्रतीत होता है कि अब अधिकारी कटरे को पूरा विश्वास है कि जो भी करेंगे, उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं।
आरोपों में घिरे अधिकारी, फिर भी न्याय के सिंहासन पर
यह तथ्य भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि बी. एस. कटरे पर स्वयं कई धाराएँ लग चुकी हैं, मामला अदालत में विचाराधीन है और वे फिलहाल जमानत पर हैं। इसके बावजूद वे उसी पद पर बने रहकर सोसायटियों की सुनवाई कर रहे हैं और लोगों को “न्याय” दे रहे हैं।
यह स्थिति अपने-आप में सवाल उठाती है—
क्या यह सिस्टम की मजबूरी है या सिस्टम की मिलीभगत?
एजीएम में खुलेआम स्वीकारोक्ति, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं
सोसायटी की एजीएम बैठक में अध्यक्ष द्वारा कई चौंकाने वाले बयान दिए गए, जो वीडियो रिकॉर्डिंग में कैद थे, जिनमें—
- अवैध निर्माण पर लगे ₹1,08,000 के जुर्माने को सोसायटी द्वारा न देने की घोषणा
- रूम दलाली की खुलेआम स्वीकारोक्ति
- “कितना भी जोर लगा लो, मैं पद नहीं छोड़ूँगा” जैसी चुनौती
- कचरे के मुद्दे पर सवाल उठाने वाली महिला सदस्य को अपमानजनक जवाब— “कचरा सूंघो”
यह सब एजीएम वीडियो में रिकॉर्ड था।
वीडियो से ‘सच’ गायब करने का खेल
पहले तीन महीने तक वीडियो देने से इनकार, फिर दबाव में आकर वीडियो जारी किया गया—
लेकिन छह घंटे की रिकॉर्डिंग में सिर्फ 58 मिनट का वीडियो चलना, उसके बाद अपने-आप बंद हो जाना, यह साफ संकेत देता है कि—
👉 जिस सच से डर था, वही काट दिया गया।
जब सदस्यों ने इस छेड़छाड़ पर सवाल उठाया, तो जवाब मिला—
“ज्यादा दिक्कत है तो म्हाडा जाओ, कोर्ट जाओ।”
यह जवाब नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे का मज़ाक है।

अवैध पार्किंग से ऑटो रिक्शा स्टैंड तक
पहले म्हाडा के आपातकालीन मार्ग को अवैध पार्किंग बनाकर वर्षों तक वसूली की गई।
जब म्हाडा क्षेत्र निर्माण गोरेगांव ने नोटिस जारी किया, तो उसी जगह बिल्डिंग 1D को ऑटो रिक्शा स्टैंड बना दिया गया।
जबकि सोसायटी के अंदर की पार्किंग उपनिबंधक के अधिकार क्षेत्र में आती है—
और वहाँ कर्ता-धर्ता वही बी. एस. कटरे हैं।
दोषी ठहराने के बाद भी ‘बरी’ कैसे?
म्हाडा के अधिकारी महाजन द्वारा जांच के बाद रिपोर्ट देखे: क्लिक करें..
यह भी रिकॉर्ड में है कि म्हाडा अधिकारी महाजन ने अध्यक्ष को दोषी ठहराया,
लेकिन सुनवाई के बाद बी. एस. कटरे ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अब सवाल सीधा है—
यह न्याय है, पैसे का खेल है या फिर कुछ और?

कटाक्ष नहीं, सिस्टम से सवाल
अगर
- सरकार अधिकारियों को बचा रही है
- अधिकारी अध्यक्ष को बचा रहा है
- और अध्यक्ष खुलेआम कह रहा है कि उसे किसी का डर नहीं
तो फिर आम रूम मालिक और नागरिक जाए तो जाए कहाँ?
यह मनमानी नहीं तो और क्या है?
यह सिस्टम फेलियर नहीं तो और क्या है?
अब इस पूरे मामले पर जवाब
या तो मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी के अध्यक्ष दें,
या फिर म्हाडा उपनिबंधक अधिकारी बी. एस. कटरे।
क्योंकि जब “कानून” चुप हो जाए,
तो सवाल पूछना ही आख़िरी जिम्मेदारी बचती है।


