म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे के ‘सपोर्ट’ में ओम सिद्धविनायक सोसाइटी का कब्जा पूरा!

मुम्बई/वशिष्ठ वाणी। मलाड पश्चिम—मालवणी गेट नंबर 8, सामना नगर में अवैध कब्जे और निर्माण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि मालवणी ओम सिद्धविनायक सोसाइटी ने म्हाडा की जमीन पर अवैध गार्डन निर्माण कर पूरा काम न केवल निपटा लिया, बल्कि यह सब म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे की खुली शह पर हुआ।

शिकायतें हुई ‘बहरे कानों’ में दफन

वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी मीडिया द्वारा इस अवैध निर्माण की शिकायतें लगातार अधिकारी रोहित शिंदे तक पहुंचाई गईं, लेकिन न तो जवाब मिला और न ही कार्रवाई। सवाल यह उठता है कि आखिर किस दबाव या ‘सैटिंग’ के तहत रोहित शिंदे ने मामले को फाइलों में ही दफन कर दिया।


अवैध गार्डन बना 15 साल पुराने वाटर टैंक पर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह को गार्डन घोषित कर कब्जा किया गया, वह दरअसल 15 वर्ष पुराना वाटर टैंक है, जिसके ऊपर इस तरह का भार तकनीकी और सुरक्षा दृष्टि से बेहद खतरनाक माना जाता है।

लेकिन सोसाइटी के पदाधिकारियों के हौसले इतने बुलंद कि सुरक्षा की परवाह तक नहीं की गई।


26 जनवरी का कार्यक्रम भी वाटर टैंक पर!

26 जनवरी के दिन उसी वाटर टैंक पर:

✔ करीब 15 लोग बैठे
✔ कुछ लोग खड़े रहे
✔ बच्चों से मंचन व डांस कराया गया

इस पूरे आयोजन का संचालन ओम सिद्धविनायक सोसाइटी के अध्यक्ष और सचिव कर रहे थे, मानो उन्हें किसी नियम या जोखिम का कोई भय ही न हो।

सवाल यह है कि —
क्या वाटर टैंक अब मंच, पार्क और आयोजन स्थल भी बन चुका है?


रोहित शिंदे का ‘कवच’ — शिकायतों की पहले ही जानकारी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सोसाइटी पदाधिकारी इसलिए बेखौफ हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि—

“अगर कोई शिकायत करेगा, तो म्हाडा के अधिकारी रोहित शिंदे पहले ही उन्हें सूचना दे देंगे।”

यानी शिकायत पहुंचने से पहले ही जवाब तैयार, और कार्रवाई से पहले ही बचाव।


पुराना अध्याय: अवैध पार्किंग का खेल

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक व्यक्ति ने फेडरेशन के नाम पर फायर ब्रिगेड की आपातकालीन पहुंच वाली जगह पर अवैध पार्किंग शुरू कर दी, जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना की स्थिति में राहत कार्य तक बाधित हो सकता था।

जब मामले की जानकारी रोहित शिंदे तक पहुंची तो उनका जवाब था—

“अब मैं वहां जाकर सभी वाहन नहीं हटवाने वाला।”

कार्रवाई सोसाइटी पर नहीं, बल्कि उन लोगों पर होनी थी जिन्होंने अवैध कब्जा किया, लेकिन फेडरेशन के अध्यक्ष व सचिव पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

म्हाडा ऑफिस में हुई ‘डील’?

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिस दिन रोहित शिंदे मौके पर पहुंचे थे, उस दिन वे सुरक्षाकर्मी तक को चेतावनी देते दिखे। लेकिन बाद में फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव म्हाडा कार्यालय विज़िट के बाद अचानक माहौल बदल गया—
कार्रवाई गायब… और फेडरेशन बेफिक्र!

दीवारें टूटीं, दीवारें बनीं, गेट लगा — सब अनुमति बिना

रोहित शिंदे की चुप्पी और अनुमति जैसी सुविधा ने ओम सिद्धविनायक सोसाइटी का हौसला बढ़ाया। सोसाइटी ने—

✔ बिना किसी अनुमति के दीवार तोड़ी
✔ नई दीवार पीछे निर्माण की
✔ मालवणी ओम सिद्धविनायक सोसाइटी और अष्ट विनायक सोसाइटी के बीच गेट लगा दिया
✔ और उसी कब्जे वाली जगह पर गार्डन तैयार कर दिया

ये सब निर्माण म्हाडा की जानकारी में होते हुए भी खुलेआम हुआ।

ब्लूप्रिंट का खुलासा भी बेअसर

जब मीडिया ने ब्लूप्रिंट की कॉपी रोहित शिंदे को भेज कर पूछा कि—

“जब म्हाडा ने सभी सोसायटी को दो गार्डन आवंटित किए हैं, तो यह तीसरा अवैध गार्डन किस नियम के तहत बन रहा है?”

तो आज तक न जवाब मिला…
न नोटिस…
न कार्रवाई।

नियमों की कब्र पर कब्जे का बगीचा

यह पूरा मामला एक ही बात साबित करता है—
जहां नियमों का राज खत्म हो जाए, वहां अवैध कब्जों का गार्डन खिलना शुरू हो जाता है… और इस बार उसका माली कोई और नहीं बल्कि खुद म्हाडा का जिम्मेदार अधिकारी ही था।